e-Note भारतीय दण्ड संहिता : अपराध के विभिन्न चरण - 06

क्रमशः ...

  • इंग्लैण्ड की दाण्डिक विधि में प्रतिनिहित दायित्व के सिध्दांत को नहीं अपनाया गया है। केवल अपवाद के रूप में निम्नलिखित दशाओं में सेवक द्वारा किये गये अपराध कृत्य का आपराधिक दायित्व उसके स्वामी (मालिक) पर होगा –
    1. अपमान लेख (Libel) -  स्वामी अपने नौकर द्वारा प्रकाशित अपमान-लेख के लिये उत्तरदायी होता है। इस नियम का मुख्य उद्देश्य अखबार मालिकों को दण्डित करना है। मालिक अपने बचाव में अज्ञात या उपेक्षा का सहारा नहीं ले सकता।
    2. लोक उपताप (Public Nuisance) – स्वामी अपने सेवक द्वारा कारित लोक उपताप के लिए प्रतिनिहित दायित्व के अधीन होता है। स्वामी यह दर्शाकर कि कार्य को स्पष्टतः निषिध्द किया था, अपने आपको निर्दोष साबित नहीं कर सकता। भू-स्वामियों का यह दायित्व होता है कि वे अपनी सम्पत्ति की देखभाल इस प्रकार करं जिससे अन्य व्यक्तियों के अधिकारों को चोट कारित न हो। इस दायित्व का उल्लंघन आपराधिक रूप में दण्डनीय होता है। लोक उपताप से सम्बन्धित भारतीय विधि, भारतीय दण्ड संहिता की धारा 268 में वर्णित है।
    3. न्यायालय का अवमान (Contempt of Court) – प्रतिनिहित दायित्व का तीसरा अपवाद है – न्यायालय का अवमां।
  • भारतीय दण्ड संहिता में भूमि या परिसर के स्वामी या अधिभोगी पर प्रतिनिहित दायित्व आरोपित किया जा सकता है जिसमें विधि विरूध्द जमाव या बलवा हुआ है, चाहे भले ही ऐसे जमाव या बलवे में उस स्वामी या अधिभोगी का कोई सरोकार न रहा हो। इस संदर्भ में दांडिक प्रावधान भारतीय दण्ड संहिता की धारा 154 तथा 155 में दिये गये हैं।
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