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Sudhanshu Kumar Mishra
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भारतीय दण्ड संहिता : धारा (401 से 500 तक)
धारा 401 - चोरों के गिरोह का होने के लिए दण्ड।
धारा 402 - डकैती करने के प्रयोजन से एकत्रित होना।
धारा 403 - सम्पत्ति का बेईमानी से गबन / दुरुपयोग।
धारा 404 - मॄत व्यक्ति की मॄत्यु के समय उसके कब्जे में सम्पत्ति का बेईमानी से गबन / दुरुपयोग।
धारा 405 - आपराधिक विश्वासघात।
धारा 406 - विश्वास का आपराधिक हनन
धारा 407 - कार्यवाहक, आदि द्वारा आपराधिक विश्वासघात।
धारा 408 - लिपिक या सेवक द्वारा विश्वास का आपराधिक हनन
धारा 409 - लोक सेवक या बैंक कर्मचारी, व्यापारी या अभिकर्ता द्वारा विश्वास का आपराधिक हनन
धारा 410 - चुराई हुई संपत्ति
धारा 411 - चुराई हुई संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना
धारा 412 - ऐसी संपत्ति को बेईमानी से प्राप्त करना जो डकैती करने में चुराई गई है।
धारा 413 - चुराई हुई संपत्ति का अभ्यासतः व्यापार करना।
धारा 414 - चुराई हुई संपत्ति छिपाने में सहायता करना।
धारा 415 - छल
धारा 416 - प्रतिरूपण द्वारा छल
धारा 417 - छल के लिए दण्ड।
धारा 418 - इस ज्ञान के साथ छल करना कि उस व्यक्ति को सदोष हानि हो सकती है जिसका हित संरक्षित रखने के लिए अपराधी आबद्ध है
धारा 419 - प्रतिरूपण द्वारा छल के लिए दण्ड।
धारा 420 - छल करना और बेईमानी से बहुमूल्य वस्तु / संपत्ति देने के लिए प्रेरित करना
धारा 421 - लेनदारों में वितरण निवारित करने के लिए संपत्ति का बेईमानी से या कपटपूर्वक अपसारण या छिपाना
धारा 422 - त्रऐंण को लेनदारों के लिए उपलब्ध होने से बेईमानी से या कपटपूर्वक निवारित करना
धारा 423 - अन्तरण के ऐसे विलेख का, जिसमें प्रतिफल के संबंध में मिथ्या कथन अन्तर्विष्ट है, बेईमानी से या कपटपूर्वक निष्पादन
धारा 424 - सम्पत्ति का बेईमानी से या कपटपूर्वक अपसारण या छिपाया जाना
धारा 425 - रिष्टि / कुचेष्टा।
धारा 426 - रिष्टि के लिए दण्ड
धारा 427 - कुचेष्टा जिससे पचास रुपए का नुकसान होता है
धारा 428 - दस रुपए के मूल्य के जीवजन्तु को वध करने या उसे विकलांग करने द्वारा रिष्टि
धारा 429 - किसी मूल्य के ढोर, आदि को या पचास रुपए के मूल्य के किसी जीवजन्तु का वध करने या उसे विकलांग करने आदि द्वारा कुचेष्टा।
धारा 430 - सिंचन संकर्म को क्षति करने या जल को दोषपूर्वक मोड़ने द्वारा रिष्टि
धारा 431 - लोक सड़क, पुल, नदी या जलसरणी को क्षति पहुंचाकर रिष्टि
धारा 432 - लोक जल निकास में नुकसानप्रद जलप्लावन या बाधा कारित करने द्वारा रिष्टि
धारा 433 - किसी दीपगॄह या समुद्री-चिह्न को नष्ट करके, हटाकर या कम उपयोगी बनाकर रिष्टि
धारा 434 - लोक प्राधिकारी द्वारा लगाए गए भूमि चिह्न के नष्ट करने या हटाने आदि द्वारा रिष्टि
धारा 435 - सौ रुपए का या (कॄषि उपज की दशा में) दस रुपए का नुकसान कारित करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा कुचेष्टा।
धारा 436 - गॄह आदि को नष्ट करने के आशय से अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा कुचेष्टा।
धारा 437 - किसी तल्लायुक्त या बीस टन बोझ वाले जलयान को नष्ट करने या असुरक्षित बनाने के आशय से कुचेष्टा।
धारा 438 - धारा 437 में वर्णित अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा की गई कुचेष्टा के लिए दण्ड।
धारा 439 - चोरी, आदि करने के आशय से जलयान को साशय भूमि या किनारे पर चढ़ा देने के लिए दण्ड।
धारा 440 - मॄत्यु या उपहति कारित करने की तैयारी के पश्चात् की गई रिष्टि
धारा 441 - आपराधिक अतिचार।
धारा 442 - गॄह-अतिचार
धारा 443 - प्रच्छन्न गॄह-अतिचार
धारा 444 - रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार
धारा 445 - गॄह-भेदन।
धारा 446 - रात्रौ गॄह-भेदन
धारा 447 - आपराधिक अतिचार के लिए दण्ड।
धारा 448 - गॄह-अतिचार के लिए दण्ड।
धारा 449 - मॄत्यु से दंडनीय अपराध को रोकने के लिए गॄह-अतिचार
धारा 450 - अपजीवन कारावास से दंडनीय अपराध को करने के लिए गॄह-अतिचार
धारा 451 - कारावास से दण्डनीय अपराध को करने के लिए गॄह-अतिचार।
धारा 452 - बिना अनुमति घर में घुसना, चोट पहुंचाने के लिए हमले की तैयारी, हमला या गलत तरीके से दबाव बनाना
धारा 453 - प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन के लिए दंड
धारा 454 - कारावास से दण्डनीय अपराध करने के लिए छिप कर गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन करना।
धारा 455 - उपहति, हमले या सदोष अवरोध की तैयारी के पश्चात् प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन
धारा 456 - रात में छिप कर गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन के लिए दण्ड।
धारा 457 - कारावास से दण्डनीय अपराध करने के लिए रात में छिप कर गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन करना।
धारा 458 - क्षति, हमला या सदोष अवरोध की तैयारी के करके रात में गॄह-अतिचार।
धारा 459 - प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या गॄह-भेदन करते समय घोर उपहति कारित हो
धारा 460 - रात्रौ प्रच्छन्न गॄह-अतिचार या रात्रौ गॄह-भेदन में संयुक्ततः सम्पॄक्त समस्त व्यक्ति दंडनीय हैं, जबकि उनमें से एक द्वारा मॄत्यु या घोर उपहति कारित हो
धारा 461 - ऐसे पात्र को, जिसमें संपत्ति है, बेईमानी से तोड़कर खोलना
धारा 462 - उसी अपराध के लिए दंड, जब कि वह ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया है जिसे अभिरक्षा न्यस्त की गई है
धारा 463 - कूटरचना
धारा 464 - मिथ्या दस्तावेज रचना
धारा 465 - कूटरचना के लिए दण्ड।
धारा 466 - न्यायालय के अभिलेख की या लोक रजिस्टर आदि की कूटरचना
धारा 467 - मूल्यवान प्रतिभूति, वसीयत, इत्यादि की कूटरचना
धारा 468 - छल के प्रयोजन से कूटरचना
धारा 469 - ख्याति को अपहानि पहुंचाने के आशय से कूटरचन्न
धारा 470 - कूटरचित 2[दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेखट
धारा 471 - कूटरचित दस्तावेज या इलैक्ट्रानिक अभिलेख का असली के रूप में उपयोग में लाना
धारा 472 - धारा 467 के अधीन दण्डनीय कूटरचना करने के आशय से कूटकॄत मुद्रा, आदि का बनाना या कब्जे में रखना
धारा 473 - अन्यथा दण्डनीय कूटरचना करने के आशय से कूटकॄत मुद्रा, आदि का बनाना या कब्जे में रखना
धारा 474 - धारा 466 या 467 में वर्णित दस्तावेज को, उसे कूटरचित जानते हुए और उसे असली के रूप में उपयोग में लाने का आशय रखते हुए, कब्जे में रखना
धारा 475 - धारा 467 में वर्णित दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिए उपयोग में लाई जाने वाली अभिलक्षणा या चिह्न की कूटकॄति बनाना या कूटकॄत चिह्नयुक्त पदार्थ को कब्जे में रखना
धारा 476 - धारा 467 में वर्णित दस्तावेजों से भिन्न दस्तावेजों के अधिप्रमाणीकरण के लिए उपयोग में लाई जाने वाली अभिलक्षणा या चिह्न की कूटकॄति बनाना या कूटकॄत चिह्नयुक्त पदार्थ को कब्जे में रखना
धारा 477 - विल, दत्तकग्रहण प्राधिकार-पत्र या मूल्यवान प्रतिभूति को कपटपूर्वक रदद््, नष्ट, आदि करना
धारा 478 - व्यापार चिह्न
धारा 479 - सम्पत्ति-चिह्न
धारा 480 - मिथ्या व्यापार चिह्न का प्रयोग किया जाना
धारा 481 - मिथ्या सम्पत्ति-चिह्न को उपयोग में लाना
धारा 482 - मिथ्या सम्पत्ति-चिह्न को उपयोग करने के लिए दण्ड।
धारा 483 - अन्य व्यक्ति द्वारा उपयोग में लाए गए सम्पत्ति चिह्न का कूटकरण
धारा 484 - लोक सेवक द्वारा उपयोग में लाए गए चिह्न का कूटकरण
धारा 485 - सम्पत्ति-चिह्न के कूटकरण के लिए कोई उपकरण बनाना या उस पर कब्जा
धारा 486 - कूटकॄत सम्पत्ति-चिह्न से चिन्हित माल का विक्रय
धारा 487 - किसी ऐसे पात्र के ऊपर मिथ्या चिह्न बनाना जिसमें माल रखा है
धारा 488 - किसी ऐसे मिथ्या चिह्न को उपयोग में लाने के लिए दण्ड
धारा 489 - क्षति कारित करने के आशय से सम्पत्ति-चिह्न को बिगाड़ना
धारा 490 - समुद्र यात्रा या यात्रा के दौरान सेवा भंग
धारा 491 - असहाय व्यक्ति की परिचर्या करने की और उसकी आवश्यकताओं की पूर्ति करने की संविदा का भंग
धारा 492 - दूर वाले स्थान पर सेवा करने का संविदा भंग जहां सेवक को मालिक के खर्चे पर ले जाया जाता है
धारा 493 - विधिपूर्ण विवाह का धोखे से विश्वास उत्प्रेरित करने वाले पुरुष द्वारा कारित सहवास।
धारा 494 - पति या पत्नी के जीवनकाल में पुनः विवाह करना
धारा 495 - वही अपराध पूर्ववर्ती विवाह को उस व्यक्ति से छिपाकर जिसके साथ आगामी विवाह किया जाता है।
धारा 496 - विधिपूर्ण विवाह के बिना कपटपूर्वक विवाह कर्म पूरा करना।
धारा 497 - व्यभिचार
धारा 498 - विवाहित स्त्री को आपराधिक आशय से फुसलाकर ले जाना, या निरुद्ध रखना
धारा 499 - मानहानि
धारा 500 - मानहानि के लिए दण्ड।
Sudhanshu Mishra
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Indian Penal Code (IPC)
Law
PCS (J)
APO
ADPO
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