गोवा पर 1510 में अधिकार करने वाला अलफांसो-डी-अल्बूकर्क जब वायसराय था, तब फारस की खाड़ी में स्थित हरमुज से लेकर मलाया में स्थित मलक्का और इंडोनेशिया के स्पाइस आइसलैंड तक एशिया के पूरे समुद्र तट पर पुर्तगालियों ने अधिकार जमा लिया। उन्होंने भारत के तटीय क्षेत्र पर भी कब्जा कर लिया। अपना व्यापार व अधिकार क्षेत्र बढ़ाने और यूरोपीय प्रतिनिधियों से अपने व्यापारिक एकाधिकार को सुरक्षित करने के लिए लगातार लड़ाई में लड़ते रहे। वे समुद्री डकैती और लूटपाट में भी पीछे नहीं रहे। अमानवीय अत्याचार करने और अव्यवस्था फैलाने में भी उनका हाथ रहा। उनके बर्बर व्यवहार के बावजूद भारत में कुछ इलाकों पर उनका कब्ज़ा लगभग एक सदी तक बना रहा।
इसका कारण यह था कि खुले समुद्र पर उनका राज चलता था। उनके सैनिक और प्रशासक कड़े अनुशासन के पाबंद थे और क्योंकि दक्षिण भारत मुगल साम्राज्य से बाहर था, इसलिए उन्हें मुगलों की ताकत का सामना नहीं करना पड़ा।
16वीं सदी के उत्तरार्ध में इंग्लैंड और हालैंड फिर बाद में फ्रांस जैसी उभरती हुई व्यापारिक और प्रतिद्वंदी शक्तियों ने विश्व व्यापार पर स्पेनी और पुर्तगाली एकाधिकार के खिलाफ एक कड़ा संघर्ष छेड़ दिया। इस संघर्ष में स्पेन और पुर्तगाल की हार हुई। अब अंग्रेज और डच व्यापारी केप ऑफ गुड होप होकर भारत जाने वाले रास्ते का प्रयोग करने लगे और पूर्व में अपना साम्राज्य बनाने की दौड़ में शामिल हो गए। अंत में इंडोनेशिया पर डच का और भारत, श्रीलंका तथा मलाया पर अंग्रेजों का अधिकार हो गया।