राज्य पुनर्गठन से संबंधित आयोग एवं समितियां (1)

आजादी के कुछ समय बाद भारतीय जनता के द्वारा भाषा के आधार पर नए राज्यों के गठन  की मांग की जाने लगी।पहले भी 1920 के कांग्रेस अधिवेशन में जो संविधान बनाया गया था वह भाषायी प्रांतों पर आधारित था लेकिन भारत सरकार भाषायी आधार पर राज्यों के गठन की मांग को हमेशा मना करती रही थी।

1. धर आयोग

आजादी के बाद भाषायी आधार पर राज्यों के पुनर्गठन की मांग को ध्यान में रखते हुए संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 27 नवंबर 1947 को न्यायमूर्ति एस. केे. धर की अध्यक्षता में भाषायी प्रांत आयोग (linguistic province commission) का गठन किया।
• इस कमीशन ने अपनी सिफारिश में कहा कि राज्यों का पुनर्गठन भाषा के आधार पर ना होकर प्रशासनिक सुविधा के आधार पर होना चाहिए।

2. जे . वी. पी समिति

धर आयोग की सिफारिश के बाद जे . वी. पी समिति  का गठन किया गया। इस समिति का गठन दिसंबर 1948 में किया गया था।

• इस समिति ने सरकार के समक्ष अपनी सिफारिश अप्रैल 1949 में पेश की थी।
• इस समिति में जवाहरलाल नेहरू , वल्लभभाई पटेल एवं पटृटाभि सीतारमैय्या शामिल थे।

• इस समिति ने भाषा के आधार पर राज्यों के पुनर्गठन को उस समय में अव्यवहारिक बताया था।

• भाषायी राज्य पुनर्गठन आंदोलन के दौरान गांधीवादी नेता पोट्टृी श्रीरामुलू (कांग्रेसी) का 56 दिनों की भूख हड़ताल के बाद निधन हो गया। अतः सरकार को विवश होकर भाषाई आधार पर राज्य के गठन की मांग को स्वीकार करना पड़ा। अतः सरकार ने आंध्र राज्य अधिनियम 1953 पास करके मद्रास के 16 उत्तरी तेलुगू जिलों के क्षेत्रों को निकाल कर 1,अक्टूबर 1953 को आंध्र राज्य गठित किया।
• इसके पश्चात मद्रास प्रांत के बचे हुए छात्रों को तमिल भाषी राज्य के रूप में रखा गया और सन 1969 में इसका नाम तमिलनाडु रख दिया गया।

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