द्विवेदी युग-2
हरिऔध जी ने 3 महाकाव्य लिखे-1. प्रियप्रवास- इसके पहले का नाम ब्रजांगना विलाप था, 2. परिजात- 15 सर्ग, 3. वैदेहीवनवास, 18 सर्ग। अन्य रचनाएं- कृष्ण शतक, रसिक रहस्य, प्रेमांवु वारिधि प्रेम प्रपंच, प्रेभाश्रु वर्षण, प्रेमांवु-प्रवाह, बोलचाल, फूलपत्ते, कल्पलता, ग्राम गीत हरिऔध सतसई, मर्मस्पश।
बिहारी रत्नाकर के सम्पादक श्री जगन्नाथ दास रत्नाकर जी हैं।
हिंडोला, समालोचनादर्श, हरिश्चन्द्र, कल काशी, श्रृंगार लहरी, गंगा लहरी, विष्णुलहरी, रतनाष्टक, वीराष्टक, प्रकीर्ण पद्यावली, गंगावतरण, उद्धव शतक आदि रत्नाकर जी के महत्वपूर्ण काव्य ग्रंथ हैं।
रत्नाकर जी ने सुधाकर, कविकुलकण्ठा भरण, दीप प्रकाश, सुंदर श्रृंगार, नखशिख, हम्मीरहठ, रस विनोद, समस्यापूर्तिग्, हिमतरंगिनी, सुजान सागर, बिहारी रत्नाकर तथा ‘अपूर्ण’ ग्रंथ सूरसागर का सम्पादन भी किया है।
रत्नाकर जी ने सरस्वती और साहित्य सुधनिधि के सम्पादन में भी योगदान दिया है।
श्री मैथिलीशरण गुप्त जी ने 2 महाकाव्य तथा उन्नीस खण्डकाव्य लिखे हैं।
मैथिलीशरण गुप्त जी की महत्वपूर्ण रचनाएं-रंग में भंग, भारत-भारती, साकेत, यशोधरा, जयद्रथ बध, झंकार, सिद्धराज, कुणाल गीत, अनध पंचवटी, द्वापर नहुष, पृथ्वी पुत्र प्रदक्षिणा हिन्दू विकट-भट विष्णुप्रिया, वैतालिक, प्लासी का युद्ध मेघनाथ वध, वृत्तसंहार, आपकी अनूदित रचनाएं हैं।
साकेत कुल 12 सर्ग है। कैकेई का अनुताप-साकेत के आठवे सर्ग से तथा गीत-नर्वे सर्ग से लिया गया है।