छायावाद
डाॅ0 नगेन्द्र ने छायावाद को ”स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह’ कहा है।
कामायनी में सर्गों की सं0-15 जो क्रमशः है- चिंता, आशा, श्रद्धा, काम, वासना, लज्जा, कर्म, ईष्र्या, इड़ा, स्वप्न, संघर्ष निर्वेद, दर्शन रहस्य आवनंद।
छायावादी प्रवृत्ति का दर्शन प्रसाद जी के ‘झरना’ नामक कृति से होता है।
ब्रजभाषा से खड़ी बोली में रूपान्तरित प्रसाद जी की रचना-प्रेमपथिक।
प्रसाद जी के बचपन का नाम ‘झारखण्डी’ था।
प्रसाद जी के खड़ी बोली रचनाओं का प्रथम संग्रह-कानन-कुसुम।
प्रसाद जी ब्रजभाषा में कलाधर नाम से कविता करते थे।
कामायनी का प्रमुख छंद ताटंक है।
पंत जी की पहली कविता -गिरजे का घंटा
पंत की छायावादी कृतियाँ-उच्छवास, ग्रंथि, वीणा पल्लव, गंुजन।
पंत जी के बचपन का नाम-गुसाई दत्त था।
प्रसाद जी की रचनाएं-उर्वशी चम्पू काव्य वन मिलन, प्रेम राज्य, अयोध्या का उद्धार, शोकाच्छवास वभुवाहन कानन कुसुम, प्रेम पथिक, करूणालय, महाराणा का महत्व, चित्राधार झरना, आँसू, लहर, कामायनी।
निराला जी की रचनाएं-जूही की कली (1923), अनामिका, परिमल, गीतिका, तुलसीदास, कुकुरमुत्ता, अणिमाव, बेला, नये पत्ते, अर्चना, आराधाना, गीतगंुज सांध्य काकली।
पंत जी की रचनाएं-उच्छवास, ग्रंथि, वीणा, पल्लव, गंुजन, युगान्त, युगवाणी, ग्राम्या, स्वर्ण किरन, स्वर्ण धूलि, युगपथ, उततरा, अणिमा, वाणी, कला और बूढ़ा चाँद, पल्लविनी, रश्मिबंधन, चिदम्बरा, पतझड़, लोकायतन (महाकाव्य) सत्यकाम।
महादेवी वर्मा की रचनाएं-नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत, दीपशिखा, यामा (चारों के संकलित गीत) महादेवी वर्मा का प्रथम काव्य संग्रह-नीहार।
सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला के बचपन का नाम-सूर्य कुमार