प्रताप नारायण मिश्र को द्वितीय भारतेन्दु कहा जाता है।
हरिऔध को अपने युग का सम्राट कहा जाता है।
हिन्दी का शरत-जैनेन्द्र को कहा जाता है।
बीसवीं सदी में वैदिक युगा का माॅडल सियाराम शरण गुप्त को कहा जाता है।
स्वतंत्र भारत का वैतालिक-दिनकर को कहा जाता है।
परतंत्र भारत का वैतालिक भारतेन्दु को कहा जाता है।
शिवानी का वास्तविक नाम-गौरा पंत है।
छायावाद के लघुत्री में -डाॅ0 राम कुमार वर्मा, महादेवी वर्मा और माखन लाल चतुर्वेदी आते है।
पंत जी माक्र्सवाद से प्रभावित होकर रूपाभा पत्रिका का सम्पादन किये।
पंत जी को ‘कला और बूढ़ा चाँद’ पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला।
लोकायतन पर सोवियत पुरस्कार मिला।
चिदम्बरा पर ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला।
निराला जी को एक विद्रोही कवि भी कहा जाता है।
आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के सानिध्य में आने के बाद निराला जी ने ‘समन्वय’ और मतवाला पत्रिका का सम्पादन किया।
निराला जी ने गंगा ‘पुस्तक माला’ का भी सम्पादन किया।
‘लिली’ ‘चतुरी चमार’ अलका प्रभावती, बिल्लेसुर बकरिका, निरूपमा आदि निराला जी की गद्य रचनाएं है।
सरस्वती वंदना, भारतीय वंदना, जागो फिर एक बार तुलसीदास, छत्रपति शवाजी को पत्र, तुम और मैं।
महादेवी वर्मा की रचनाएं सर्वप्रथम ‘चाँद’ पत्रिका में प्रकाशित हुई।
महादेवी वर्मा जी के ‘यामा’ पर ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला था।
नंद दुलारे बाजपेयी ने कामायनी को नये युग का प्रतिनिध काव्य कहा है।
छायावाद में प्रसाद का ब्रह्मा, पंत को विष्णु तथा निराला जी को शिव माना गया है।
प्रसाद जी की प्रथम रचना-‘सावन पंचक’ और अंतिम रचना कामायनी।
कामायनी में सर्ग-15, अंगीरस-शांत दर्शन- समरसतावाद-आनंदवाद, मु0-छंद-ताटंक, पात्र, मनु श्रद्धा, इड़ा कुमार।
मनु-मन के प्रतीक, हृदय-श्रद्धा, बुद्धि-इड़ा मानव कुमार के प्रतीक हैं।
आचार्य शांतिप्रिय द्विवेदी ने कामायनी की छायावाद का उपनिषद कहा है।
निराला जी का प्रथम संग्रह-अनामिका।
निराला जी का अंतिम संग्रह-सान्ध्य काॅकली
निराला जी की प्रथम कविता-जूही की कली।
निराला जी की अंतिम कविता-पत्रात्कंठित जीवन का विष बुझा हुआ।
पंत जी की प्रथम छायावादी रचना-उच्छवास