प्रमुख प्रगतिवादी कवि
केदारनाथ अग्रवाल, नागार्जुन, वासुदेव सिंह, त्रिलोचन, रामधारी सिंह दिनकर।
त्रिलोचन के ‘अवध का किसान कवि’ कहा जाता है।
शिवमंगल सिंह ‘सुमन’ रांगेय राघव आदि प्रगतिवादी कवि है।
नागार्जुन को प्रगतिवाद का (शलाका पुरूष) कहा जाता है।
रांगेय राघव का मूलनाम त्रयंबक वीर राघवाचार्य है।
केदार नाथ अग्रवाल की रचनाएं-कालक्रमानुसार, युग की गंगा, नींद के बादल, लोक और आलोक, फूल नहीं रंग बोलते हैं, आग क ा आइना, गुलमेंहदी, पंख और पतवार, बंबई का रक्त स्नान, हे मेरी तुम, मार प्यार की थापे कहे केदार खरी-खरी, अपूर्वा, जमुन जल तुम, बोले बोल अबोल, जो शिलाएं तोड़े हैं, आत्मगंध, अनहारी हरियाली, खुली आँखे-खुली डेने, पुष्पदीप, बसंत में हुई प्रसन्न पृथ्वी।
नागार्जुन की रचनाएँ-युग धारा, सतरंगे पंखो वाली, प्यासी पथरायी आँखे, भस्मांकुर, तालाब की मछलियाँ, खिचड़ी विप्लव देखा हमने, तुमने कहा था, हजार-हजार बाहों वाली पुरानी जूतियों का कोरस।
‘भस्माॅकुर’ नागार्जुन जी का खण्ड काव्य है जो बरवै छंद में लिखा गया है।
नागार्जुन के मैथिली भाषा में लिखे गये ‘पत्रहीन नग्नगछ’ पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था।
नागार्जुन का पहला साहित्यिक उपनाम यात्री था। संस्कृत और मैथिली में ‘यात्री’ उपनाम से कविता लिखते थे।