केन्द्र एवं राज्य सरकारों में वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से लाए गए राजकोषीय उत्तरदायित्व तथा बजट प्रबन्धन अधिनियम ( FRBMA ) को लोकसभा ने 7 मई , 2003 को पारित कर दिया तथा 5 जुलाई , 2004 से अधिसूचित किया गया है । इस विधेयक में राजस्व घाटे व राजकोषीय घाटे को चरणबद्ध तरीके से इस प्रकार कम करने की बात कही गई है , ताकि वर्ष 2007 - 08 ( जिसे वर्ष 2004 - 05 के बजट में वर्ष 2008 - 09 किया गया ) तक राजस्व घाटा शून्य किया जा सके , इसके पश्चात् इस खाते में आधिक्य प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा । इस विधेयक को मूलतः वर्ष 2000 से संसद में प्रस्तुत किया गया था , जहाँ इसे स्थायी संसदीय समिति को सन्दर्भित किया गया था । मूल विधेयक में यह प्रावधान किया गया था कि राजकोषीय घाटे में प्रतिवर्ष 0.5% बिन्दु की कटौती करते हुए राजस्व घाटे को वर्ष 2005 - 2006 तक शून्य किया जाए , जबकि राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 2 % तक लाया जाए । संसदीय समिति द्वारा सुझाए गए सुधारों के बाद विधेयक के प्रावधानों में कुछ ढील दी गई थी तथा उसी के अनुरूप अब राजस्व घाटे को वर्ष 2008 - 09 तक शून्य करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है । घाटे में प्रतिवर्ष कितनी कमी की जाए , इसके लिए कोई प्रावधान अब विधेयक में नहीं किया गया है ।