केन्द्र सरकार की राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना ( NREGA )

केन्द्र सरकार की राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना ( NREGA ) , 2005 का शुभारम्भ प्रधानमन्त्री डॉ . मनमोहन सिंह ने 2 फरवरी , 2006 को आन्ध्र प्रदेश के अनन्तपुर जिले से किया । पहले चरण में देश के 27 राज्यों के 200 चुनिन्दा जिलों में इस योजना का कार्यान्वयन किया जाएगा । इसमें सर्वाधिक 23 जिले बिहार के व 22 जिले उत्तर प्रदेश के हैं । पहले चरण के कार्यान्वयन के लिए चयनित 200 जिलों में वह 150 जिले शामिल हैं , जहाँ काम के बदले रोजगार कार्यक्रम पहले से चल रहा था । काम के बदले अनाज ' योजना व ' सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना ' का विलय अब इस नई योजना में कर दिया गया है । इस योजना के अन्तर्गत न्यूनतम मजदूरी के बारे में प्रावधान यह है कि राज्य सरकारों को न्यूनतम मजदूरी अधिनियम , 1948 की धारा तीन के तहत का मजदूरों को अपेक्षित न्युनतम मजदूरी देनी होगी । इस योजना के तहत चयनित जिलों में ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक परिवार के एक सदस्य को वर्ष में कम - से - कम 100 दिन अकुशल श्रम वाले रोजगार की गारण्टी दी गई है । योजना के तहत 33 % लाभ भोगी महिलाएँ होंगी । । रोजगार के इच्छुक एवं पात्र व्यक्ति द्वारा पंजीकरण कराने के 15 दिन के भीतर न दिए जाने पर निर्धारित दर से बेरोजगारी भत्ता सरकार द्वारा प्रदान किया जाएगा । यह योजना रोजगार के अन्य कार्यक्रमों से बिल्कुल अलग है , क्योंकि यह मात्र योजना नहीं बल्कि एक कानून है , जो रोजगार की वैधानिक गारण्टी प्रदान करता है । इस अधिनियम को संसद ने वर्ष 2005 में पारित किया था । वर्ष 2009 के बाद से मनरेगा के नाम से ही नरेगा को जाना जाता है ।

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