अज्ञेय जी के संपादकत्व में 4 तार सप्तक प्रकाशित हुआ।
1. प्रथम तार सप्तक-1943ई0 में
प्रमुख कृति-अज्ञेय राम विलास शर्मा, गजानन माधव मुक्ति बोधा, प्रभाकर मधवे (बलवंत), नेमिचन्द्र जैन, गिरिजा कुमार माथुर, भारत भूषण अग्रवाल।
द्वितीय तार सप्तक-सन 1951 ई0 में शमशेर बहादुर सिंह, भावनी प्रसाद मिश्र, शकुन्तला माथुर, हरि नारायण, घनश्याम व्यास, नरेश मेहता, धर्मवीर भारती, रघुवीर सहाय।
तृतीय तार सप्तक (1959) ई0 में संकलित कवि-प्रयाग नारायण त्रिपाठी मदन वात्स्यायन, विजय देव नारायण साही, कुँवर नारायण सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, केदार नाथ सिंह, कीर्ति चैधरी।
चैथा तार सप्तक (1959 ई0) में-
संकलित कवि-अवधेश कुमार, राजकुमार कुंभज, स्वदेश भारती, नंद किशोर आचार्य, सुमन राजे, श्रीराम वर्मा, राजेन्द्र किशोर।
प्रयोगवाद की प्रवृत्तियाँ-
1. अहंकारी प्रवृत्ति की प्रधानता
2. यथार्थवाद का आग्रह
3. निराशावाद
4. बौद्धिकता का प्रधान्य
5. उपमानों की नवीनता
6. साधारण विषयों का निरूपण
7. भाषा का प्रयोग
प्रयोगवाद प्रायड के दर्शन से प्रभावित है। प्रयोगवाद के संदर्भ में कुछ विद्वानों के मत-
1. प्रयोगवाद शैलीगत विद्रोह है-डाॅ0 नगेन्द्र
2. प्रयोगवाद दृष्टिकोण का अनुसंधान है-केशरी कुमार
3. प्रयोग कलात्मक अनुभव का क्षण है-रघुवीर सहाय
4. समाज के हित में जैसी क्रांति सतत प्रक्रिया काम्य है, वैसे ही रचना के हित में प्रयोग की-डाॅ0 राम स्वरूप चतुर्वेदी।