कंकाल तंत्र के विषय में संक्षिप्त जानकारी

मानव कंकाल एक विशेष ऊतक कंकालीय ऊतक से निर्मित होता है कंकाल शरीर को ढांचा प्रदान करते हैं एवं आंतरिक अंगों की सुरक्षा भी करते हैं ।
             वाह्य कंकाल शरीर के बाहर स्थित होता है मुख्य रूप से शरीर के ताप को बनाए रखने में सहायता करता है तथा मृत कोशिकाओं से बना होता है  ।
             
 जैसे -  स्तनधारियों के बाल एवं नाखून 
         - पक्षियों के पंख 
         - जानवरों का खून  इत्यादि 
          
पक्षियों की अस्थि छिद्रयुक्त होती है जो उनके उड़ने में सहायता प्रदान करती है ।

 मनुष्य की अस्थि की सबसे प्रमुख विशेषता हारवेंसियल नाल का पाया जाना होता है । अंत: कंकाल मनुष्य में दो रूप में स्थित होता है - अस्थि और उपास्थि 

अस्थि - अस्थि के निर्माण में विटामिन D तथा कैल्शियम सहायता करता है। वयस्कों में इसकी कमी से ओस्टियोमलेसिया जबकि बच्चों में इसकी कमी से रिकेट्स नामक रोग उत्पन्न होता है ।
    
 अस्थि की कठोरता का कारण कारण कैलशियम     मैग्निशियम के पास स्थित है वयस्कों में 206 बच्चों में 300   से अधिक अस्थियां होती है मानव की सबसे बड़ी अस्थि फीमर है तथा सबसे छोटी अस्थि मध्य कर्ण की स्टेपीज है ।

हाथ की ह्यूमरस अस्थि को कंधे से जोड़ने के लिए तथा पैर की फीमर अस्थि को कूल्हे से जोड़ने के लिए जटिल प्रोटीन संरचना से निर्मित फाइबरस संरचना होती है जिसे मेखलाएं कहा जाता है ।
   मेखलाएं दो प्रकार की होती है 
   हाथ की ह्यूमरस अस्थि को कंधे से जोड़ने के लिए अंश मेखला पाई जाती है 
   तथा पैर की फीमर अस्थि को कूल्हे से जोड़ने के लिए श्रोणि मेखला पाई जाती है ।

                              उपास्थि 
                
  उपास्थि का निर्माण भी भ्रूण के मे mesoderm से होता है । उपास्थि में कैल्शियम के फास्फेट उपस्थित नहीं होते हैं इसलिए इसमें कठोरता नहीं पाई जाती है उपास्थि का मूल पदार्थ कांड्रोम्यूको प्रोटीन होता है जो तंतुओंं के बंडल के समान संरचना में एक विशेष प्रोटीन होता है अत्यधिक मजबूत तथा अधिक लचीला भी पाया जाता है ।

-अस्थि की कोशिका को ओस्टियोब्लास्ट कहा जाता है।
- अस्थि का निर्माण ओसिफिकेशन कहलाता है।
-  अस्थि का मैट्रिक्स या मूल पदार्थ ओसीन प्रोटीन होता है।
-   अस्थि में 38% ओसीन प्रोटीन और अन्य कैल्शियम    तथा मैग्नीशियम के फास्फेट मौजूद होते हैं ।

   रीड की अस्थि - मानव कशेरुकी प्राणी है क्योंकि इसमें क्षण के समान संरचना में 26 कशेरुक का बैकबोन होता है जो शुरुआत में 33 रहता है जो आपस में जुड़कर बाद में 26 रह जाता है सबसे ऊपरी कशेरुक को एटलस कहा जाता है।
  इसी पर सर टिका रहता है दो कशेरुक के बीच में  उपास्थि से निर्मित डिस्क पाई जाती है । इसकी स्थिति में परिवर्तन से मेरुरज्जु से गुजरे हुए नर्वसेल में दबाव उत्पन्न होने लगता है जिसके कारण दर्द उत्पन्न हो जाता है 

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