सियाचिन ग्लेशियर की भू-राजनीतिक स्थिति

भारत तथा पाकिस्तान के मध्य जम्मू कश्मीर राज्य में सियाचिन ग्लेशियर एक भू राजनीतिक विवाद है। इस महत्वपूर्ण भू भाग को प्राप्त करने के लिए भारत एवं पाकिस्तान दोनों शक्तियां अड़ी हैं। इसे विश्व का सर्वोच्च युद्ध क्षेत्र माना जाता है। सियाचिन ग्लेशियर जम्मू कश्मीर के लद्दाख जिले में काराकोरम श्रेणी पर स्थित 72 किलोमीटर लंबा तथा 2 - 8 किलोमीटर चौड़ा एक विवादास्पद ग्लेशियर है। इस की समुद्र तल से ऊंचाई 5700 मीटर है और इस का तापमान -50°C के आसपास रहता है।इस ग्लेशियर का दक्षिण पूर्वी दो तिहाई हिस्सा भारत के अधिकार में है।भारत की थल सेना नुब्रा घाटी से होकर सियाचिन ग्लेशियर पहुंचती है। सियाचिन ग्लेशियर में 3 दर्रे हैं जिनमें से गेसरब्रूम ,साल्टोरो तथा बिलाफोन्डला दर्रा भारत के अधिकार में है जबकि ग्योंगला दर्रा पाकिस्तान के अधिकार में है। सियाचिन ग्लेशियर के मध्य से साल्टोरो श्रेणी जाती है। जिसके उत्तरी पश्चिमी भाग पर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में के2 चोटी स्थित है।इसी के पास से होकर कराकोरम दर्रे से पाकिस्तान एवं चीन के मध्य काराकोरम उच्च मार्ग स्थित है। पाकिस्तान ने सियाचिन ग्लेशियर के काराकोरम उच्च मार्ग के पास स्थित खून्जरेव दर्रे से होकर 1984 में लगभग 70 विदेशी पर्वतारोहियों को स्काइकिंग की अनुमति दे दी थी जिसके बदले में पाकिस्तानी सरकार ने लगभग 1 मिलीयन डॉलर पर्वतारोहण शुरू को प्राप्त किया था। इसके पश्चात पाकिस्तानी सरकार ने जापानी पर्वतारोहियों को भारतीय नियंत्रण में स्थित स्थानों पर चढ़ने की अनुमति दे दिया।जिस पर भारत के विरोध करने पर पाकिस्तानी स्थल सेना ने साल्टोरो श्रेणी पर सियाचीन निरीक्षण केंद्र स्थापित किया जिसका भारतीय सेना ने मुंह तोड़ जवाब दिया था। भारत में 13 अप्रैल 1984 में सियाचिन ग्लेशियर से पाकिस्तान सेना को वापस भेजने के लिए एक ऑपरेशन मेघदूत शुरू किया तब से लेकर अब तक ग्लेशियर विवाद चल रहा है।
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