कुछ महत्वपूर्ण नदियों का विवरण । भाग 2

श्योक नदी सिन्धु नदी की सहायक नदी है । इसे मध्य एशिया में ‘ यारकण्डी ’ तथा काराकोरम क्षेत्र में ' मृत्यु की नदी ' के नाम से जाना जाता है । प्राचीन काल में मध्य एशिया के यारकण्डी से लद्दाख के बीच व्यापार इसी नदी से होता था । 

जस्कर नदी सिन्धु नदी की सहायक है । यह कठोर चट्टानी भागों से होकर बहते हुए जास्कर श्रेणी गहरे गार्ज का निर्माण करती है । इसकी उत्पत्ति हिमाचल प्रदेश एवं जम्मू - कश्मीर राज्य की सीमा पर अवस्थित सरचू के उच्च अक्षांशीय पठारी भाग से होती है । ये नदी पहले उत्तर एवं पुनः पूर्व की ओर बहते हुए अन्ततः 150 किमी की लम्बाई तय कर सिन्धु नदी में मिल जाती है । 

स्पिती नदी 16000 फीट ऊँचे कुंजुम दरें से निकलती है । यह सतलज नदी की सहायक नदी है । यह नदी 60 मील की दूरी तय करने के बाद हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में नामजिया गाँव के पास सतलज नदी में मिल जाती है ।

सतजल नदी तिब्बत में स्थित राकस झील , जिसकी ऊँचाई 4555 मी है , से निकलती है । इस नदी की कुल लम्बाई भारत में 1050 किमी है । स्पिती एवं व्यास नदी इसकी दाहिनी ओर से इसमें मिलती हैं । यह नदी महान् हिमालय और जास्कर श्रेणी दोनों को पूर्णतः काटती है और शिपकीला दरै के पास इण्डो - तिब्बत सीमा को पार करती है । हिमाचल प्रदेश में इस नदी का जल ग्रहण क्षेत्र 20000 वर्ग किमी है । 

भारत का सबसे ऊँचा भाखड़ा बाँध भाखड़ा के निकट इसी नदी पर बनाया गया है , जिसके पीछे गोविन्द सागर झील है । भाखड़ा बाँध विश्व का दूसरा सबसे ऊँचा बॉध है , जिसकी ऊँचाई नदी तल से 226 मी है एवं समुद्र तल से 518 मी है । यह भारत की सबसे बड़ी बहुद्देशीय परियोजना है ।

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