कंपनी के व्यापारिक प्रभाव का विस्तार (भाग-1)

       भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी की शुरुआत बहुत ही मामूली रही। 1623 तक इसने सूरत, भड़ौच, अहमदाबाद, आगरा और मुसलिपट्टम में फैक्ट्रियां स्थापित कर ली थी। आरंभ से अपने व्यापार और कूटनीति के साथ साथ युद्धों का भी सहारा लेने और जिन क्षेत्रों में फैक्ट्रियां स्थापित की थी उन पर कब्जा करना के भी प्रयास किए।

       दक्षिण भारत में परिस्थितियां अंग्रेजों के अधिक अनुकूल थी क्योंकि वहां उन्हें किसी शक्तिशाली भारतीय सरकार का सामना नहीं करना पड़ा। विजयनगर का महान साम्राज्य 1565 में ही नष्ट हो चुका था और उसकी जगह अनेक छोटे और कमजोर राज्य खड़े हो गए थे। उनमें लालच देकर बहलाना या अपनी सैनिक सत्य से हराना आसान था। अंग्रेजों ने दक्षिण में अपनी पहली फैक्ट्री मुसलीपटटम में 1611 में स्थापित की। पर जल्द ही उनकी गतिविधियों का केंद्र मद्रास हो गया जिसका पट्टा 1639 में वहां के स्थानीय राजा ने उन्हें दे दिया था। राजा ने उनको उस जगह की किलेबंदी करने, उसका प्रशासन चलाने और सिक्के ढालने की अनुमति इस शर्त पर दी कि बंदरगाह के प्राप्त चुंगी का आधा भाग राजा को दिया जाएगा। यहां अंग्रेजों ने अपनी फैक्ट्री के इर्द-गिर्द एक छोटा सा किला बनाया जिसका नाम फोर्ट सेंट जॉर्ज पड़ा। मुनाफे के लालची व्यापारियों की यह कंपनी शुरू से ही इस नीति पर आई थी कि भारतीय उन्हें इस देश को जीतने का खर्च स्वयं देंगे।

Posted on by