केंद्र शासित प्रदेशों का गठन
केंद्र शासित प्रदेशों पर केंद्र सरकार का नियंत्रण होता है । इन क्षेत्रों को स्वतंत्रता के बाद नहीं बनाया गया था अपितु इनका निर्माण ब्रिटिश सरकार के शासनकाल में हुआ था । ब्रिटिश सरकार ने 1874 में कुछ अनुसूचित जिले बनाए थे जिन्हें बाद में मुख्य आयुक्त के क्षेत्र के नाम से जाना जाने लगा । आजादी मिलने के बाद इन क्षेत्रों को भाग - ग और भाग - घ के राज्यों की श्रेणी में रखा गया।
- सन 1956 में साथ में संविधान संशोधन अधिनियम व राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत इन क्षेत्रों को केंद्र शासित प्रदेशों के रूप में पुनः गठित किया गया । कुछ समय बाद इनमें से कुछ केंद्रशासित प्रदेशों को पूर्ण राज्य का दर्जा मिल गया । हिमाचल प्रदेश, मणिपुर , त्रिपुरा , मिजोरम , अरुणाचल प्रदेश, व गोवा प्रारंभ में केंद्र शासित प्रदेश थे लेकिन अब वर्तमान में इन सभी राज्यों को पूर्ण राज्य का दर्जा प्रदान किया जा चुका है।
- पुर्तगालियों के चंगुल से मुक्त कराए गए क्षेत्र (गोवा , दमन - दीव और दादर और नगर हवेली) एवं फ्रांसीसियों से वापस लिए गए क्षेत्र (पुदुचेरी) केंद्र शासित प्रदेश बन गए हैं।
- 1973 तक लक्ष्यद्वीप को लकाद्वीप, मिनिकाय एवं अमिनीदीप आदि नामों से जाना जाता है।
- 1992 में दिल्ली को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के रूप में घोषित किया गया था।
- 2006 में पुदुचेरी के नाम को बदलकर पांडिचेरी कर दिया गया।
वर्तमान में भारत के 7 केंद्र शासित प्रदेश हैं। ( दिल्ली, लक्षद्वीप , दादर और नगर हवेली , दमन - दीव चंडीगढ़ , अंडमान और निकोबार द्वीप समूह।
केंद्र शासित प्रदेशों के गठन की आवश्यकता क्यों पड़ी
1. राजनीतिक व प्रशासनिक कारणों से दिल्ली तथा चंडीगढ़ को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया था।
2. संस्कृतियों में भिन्नता के आधार पर पुदुचेरी, दादर और नगर हवेली को केंद्र शासित प्रदेश में शामिल किया गया।
3.सामरिक महत्व के आधार पर अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्ष्यद्वीप का केंद्र शासित क्षेत्र के रूप में गठन किया गया
पिछड़ी अनुसूचित जनजातियों के लिए विशेष व्यवहारवाद एक बाल के लिए मिजोरम मणिपुर त्रिपुरा हुआ अरुणाचल प्रदेश को केंद्र शासित राज्य के रूप में गठित किया गया था बाद में उन्हें पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया।