राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा

भारतीय संविधान में सभी राज्यों को विकास के समान अवसर प्रदान करने के लिए प्रावधान किए गए हैं। भारत में कुछ राज्य विकसित अवस्था में है तो कुछ पिछड़े हुए हैं। पिछड़े राज्यों में वे राज्य शामिल किए गए हैं जो आर्थिक और बुनियादी सुविधाओं के कारण से बहुत पिछड़ चुके हैं।

- भारतीय संविधान में गरीब तथा पिछड़े राज्यों के विकास के लिए समान अवसर प्रदान करने हेतु उन्हें “विशेष राज्य" का दर्जा प्रदान किया गया है।

- भारतीय संविधान में किसी राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देने के लिए निम्नलिखित प्रावधान किए गए-

1. सामरिक दृष्टि से राज्य के महत्व के आधार पर
2. राज्य के पर्वतीय तथा दुर्गम अवस्थिति के आधार पर
3. न्यूनतम जनसंख्या घनत्व के आधार पर
4. आर्थिक तथा बुनियादी सुविधाओं की दृष्टि से राज्य के पिछड़ेपन के कारण।

• किसी राज्य को यदि विशेष राज्य का दर्जा दिया जाता है तो उस राज्य को केंद्र द्वारा विशेष वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।

राज्यों के लिए गाॅडगिल (gadgil formula) फार्मूला के आधार पर राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा देना प्रारंभ किया गया था।

- किस वर्ष में किस राज्य को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ

असम, नागालैंड, और जम्मू कश्मीर को वर्ष 1969 में विशेष राज्य का दर्जा दिया गया था।

हिमाचल प्रदेश (1971),  मणिपुर (1972),  मेघालय (1972), त्रिपुरा (1972), सिक्किम (1975 - 76),  मिजोरम (1986 - 87),  अरुणाचल प्रदेश (1986 - 87) व उत्तराखंड (2001) को विशेष राज्य का दर्जा दिया गया।

Posted on by