गैर परंपरागत ऊर्जा नवीकरणीय ऊर्जा है ।यह ऊर्जा सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, भूतापीय उर्जा, महासागरीय लहरों, हाइड्रोजन, बायोमास आदि स्रोतों से प्राप्त होती है। यह संसाधन नवीकरणीय तथा प्रदूषण रहित है। देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए हाल ही में बढ़ती चिंता को ध्यान में रखते हुए अक्षय ऊर्जा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने हेतु अछय ऊर्जा की पहचान एक प्रमुख इंजन के रूप में की गई है। नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय अक्षय ऊर्जा से संबंधित सभी मुद्दों पर भारत सरकार का एक शीर्ष मंत्रालय है।मंत्रालय का व्यापक लक्ष्य देश में ऊर्जा संबंधी जरूरतों की प्रतिपूर्ति के लिए अक्षय ऊर्जा विकास करना है।अन्य ऊर्जा स्रोतों की तुलना में अछय ऊर्जा स्रोत और ऊर्जा की पर्याप्तता के लिए महत्वपूर्ण अवसर देश के अधिकांश भौगोलिक क्षेत्र में मौजूद है। देश में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत की स्थापित क्षमता 31 दिसंबर 2016 तक लगभग 50000 मेगावाट थी।नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने देश के विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व वाले धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों सहित विभिन्न स्थानों पर सौर प्रकाश व्यवस्था सहित अक्षय ऊर्जा की अनेक पद्धतियों को दर्शाने के लिए एक विशेष क्षेत्र प्रदर्शन परियोजना लागू की है।
गैर परंपरागत ऊर्जा प्रणालियों में पवन विद्युत ,जल विद्युत, बायोमास विद्युत एवं गैसीकरण, अपशिष्ट से विद्युत ,सौर विद्युत, पवन चक्की से विद्युत ,बायो गैस आधारित ऊर्जा प्रणाली पारिवारिक बायोगैस संयंत्र और जल तापन संग्राहक क्षेत्र आदि शामिल होते हैं।