चक्रवात पाबुक के विषय में संक्षिप्त लेख

हाल ही में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के द्वारा चक्रवात पाबुक से संबंधित पीली चौकसी जारी की गई है । चक्रवात  पाबुक थाईलैंड की खाड़ी तथा इसके आसपास के क्षेत्र के ऊपर उत्पन्न हुआ है‌

 चक्रवात पाबुक से संबंधित चेतावनियों को चार चरणों में जारी किया जाता है यह चारों चरण  निम्नलिखित है -

किसी भी चक्रवात के लिए राज्य सरकार के अधिकारियों द्वारा चेतावनीयों को चार चरणों में प्रकाशित या निर्गत किया जाता है।

चेतावनी का पहला चरण - प्रथम चरण की चेतावनी को (प्री साइक्लोन वॉच) या चक्रवात पूर्ण सावधानी कहा जाता है जो किसी भी चक्रवात से 72 घंटे पहले दी जाती है।

   इसमें चक्रवाती क्षोभ जो उत्तरी हिंद महासागर में बनता है के बारे में चेतावनी दी जाती है इसमें यह बताया जाता है कि यह तेज होते हुए और उष्णकटिबंधीय चक्रवात का रूप लेते हुए किनारे के क्षेत्रों/तटीय क्षेत्र के मौसम को खराब कर सकता है।

चेतावनी का दूसरा चरण - दूसरे चरण की चेतावनी को चक्रवात चौकसी कहा जाता है। यह चेतावनी तटीय क्षेत्रों में मौसम के खराब होने के 48 घंटे पहले ही दे दी जाती है ।  
        इसमें मछुआरों , सामान्य लोगों , आपदा प्रबंधन , मीडिया को भी सावधान करते हुए यह सूचना दी जाती है कि यह चक्रवात कहां बन रहा है और इसकी तीव्रता कितनी है साथ ही साथ इसकी दिशा बताते हुए यह सूचना दी जाती है कि इसका प्रभाव किस तटीय क्षेत्रों में तबाही मचा सकता है।

चेतावनी का तीसरा चरण - इस चरण की चेतावनी को  चक्रवात चेतावनी कहते हैं यह चेतावनी तटीय क्षेत्रों में मौसम बिगड़ने के लगभग 24 घंटे पहले जारी कर दी जाती है ।
       इस चरण में बताया जाता है कि चक्रवात किस स्थान पर समुद्र पार कर भूमि खंड पर पहुंचेगा या भूमि के किस भाग पर अपना प्रभाव दिखाएगा । 
          तीसरे चरण में हर 3 घंटे पर चक्रवात की तीव्रता, इसकी स्थिति ,भूखंड पर आने का समय और इसके साथ-साथ प्रबल पवनों , आंधियों तथा भारी वर्षा होने की संभावना के विषय में सूचना दी जाती है।

चेतावनी का चौथा और अंतिम चरण - चौथे चरण को भूमिपात उपरांत का परिदृश्य कहा जाता है ।चक्रवात का भू भाग पर पहुंचने के लगभग 12 घंटे के पहले यह चेतावनी जारी की जाती है इस चेतावनी में भी चक्रवात की दिशा , स्थिति और मौसम के बारे में सूचना दी जाती है।

 चक्रवात चौकसी को विभिन्न रंगों के द्वारा प्रदर्शित किया जाता है-
  चक्रवात चौकसी  - पीला रंग 
  चक्रवात चेतावनी - नारंगी रंग 
  भूमिपात परिदृश्य - लाल रंग

       राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन के अनुसार अलग-अलग रंग 2006 के मानसून के बाद से चक्रवात आने से संबंधित चेतावनी देने में प्रयोग किया जाता है।

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