हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के द्वारा यह फैसला दिया गया है कि जीएम बीटी कॉटन पर मोनसेंटो कंपनी का पेटेंट पूर्ण रूप से वैध है। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश था कि भारतीय कानून के अंतर्गत कोई भी कंपनी किसी भी पौधों की प्रजातियों तथा पौधों के बीजों का पेटेंट नहीं करा सकती है ।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से बहुराष्ट्रीय कंपनी मोनसेंटो को बड़ी राहत मिली है दरअसल मोनसेंटो ने यह आरोप लगाया था कि भारतीय कंपनियां उसके बीटी कॉटन पेटेंट के नियमों का उल्लंघन कर रही हैं।
मोनसैंटो क्या है -
मेको मोनसेंटो बायोटेक मोनसेंटो और महाराष्ट्र की हाइब्रिड सीड कंपनी का संयुक्त उपक्रम है और यही कंपनी 40 से अधिक भारतीय बीज कंपनियों को जीएम काॅटन बीज की बिक्री करती है।
बेयर एजी एक जर्मनी कंपनी है जो दवा और फसलों के लिए रासायन बनाती है उसने मोनसेंटो को खरीदा है।
दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला स्थानीय कंपनी एन एस एल की याचिका पर आया था जिसमें कंपनी ने यह दावा किया था कि भारत का पेटेंट कानून मोनसेंटो को उसके जीएम कॉटन बीज पर किसी तरह के पेटेंट की इजाजत नहीं देता है इसके बाद मोनसेंटो के भारतीय साझा उपक्रम जेवी ने रॉयल्टी भुगतान के विवाद को लेकर 2015 में एन एस एल के साथ अपने करार को निरस्त कर दिया था जिसकी मंजूरी 2003 में दी गई थी ।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट को मोनसेंटो के उस दावे को भी देखना था जिसमें उन्होंने कहा था कि NSL ने बीटी कॉटन सीड को लेकर उसकी बौद्धिक संपदा का उल्लंघन किया है । सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को पलट दिया है जिसकी वजह से मोनसेंटो जीएम कॉटन सीड पर पेटेंट का दावा नहीं कर पा रही थी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को विदेशी कृषि कंपनियों के लिए राहत के तौर पर देखा जा रहा है , इसमें कुछ विदेशी कंपनियां जैसे - मोनसेंटो, बेयर, सिंजेंटा , पायोनियर आदि है । इन कंपनियों को भी भारत में जीएम फसलों पर पेटेंट के हाथ से जाने का डर सता रहा है भारत दुनिया में सबसे अधिक कपास का उत्पादन करने वाला देश है कपास का विश्व में दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश की है
अमेरिकी बीज निर्माता कंपनी जीएम , कॉटन सीड्स पर पेटेंट का दावा भी कर सकती है।