दण्ड न्यायालयों और कार्यालयों का गठन (धारा 6 से धारा 25 क तक)
- संहिता में कानून से जुडी मुख्यतः 5 अभिकर्तृत्व की बात की गयी है। ये 5 अभिकर्तृत्व निम्नलिखित हैं:- 1 - पुलिस 2 - अभियोजन 3 - बचाव पक्ष 4 - मजिस्ट्रेट एवं उच्च न्यायालय की अदालतें 5 - जेल प्रशासन एवं पर्सनेल
- भारत के संविधान के भाग – IV में राज्य की नीति के निदेशक सिध्दान्त के अन्तर्गत कार्यपालिका और न्यायपालिका को पृथक रखे जाने की नीति का उल्लेख किया गया है। इस लीति को कार्यान्वित किये जाने के उद्देश्य से दण्ड प्रक्रिया संहिता, 1973 में दो प्रकार के दण्डाधिकारियों की व्यवस्था की गई है – न्यायिक मजिस्ट्रेट तथा कार्यपालक मजिस्ट्रेट। न्यायिक मजिस्ट्रेट राज्य के उच्च न्यायालय के अधीन कार्य करते है जबकि कार्यपालक मजिस्ट्रेटों को राज्य शासन के नियंत्रण में रखा गया है।
- धारा 6 में ‘दण्ड न्यायालयों के वर्ग’ का उल्लेख किया गया है। इसके अनुसार – उच्च न्यायालयों और इस संहिता से भिन्न किसी विधि के अधीन गठित न्यायालयों के अतिरिक्त, प्रत्येक राज्य में निम्नलिखित वर्गों के दण्ड न्यायालय होंगे, अर्थात् –
- सेशन न्यायालय;
- प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट और किसी महानगर क्षेत्र में महानगर मजिस्ट्रेट;
- द्वितिय वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट; और
- कार्यपालक मजिस्ट्रेट
अभी अगले नोट्स में धारा 6 के बारे में विस्तारित है ...