दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 : दण्ड न्यायालयों और कार्यालयों का गठन - 02

क्रमशः ... 

  • धारा 6 के पद-विन्यास से स्पष्ट है कि दंड न्यायालयों के विभिन्न वर्गों में उच्च न्यायालय का भी समावेश है। इस संहिता में उच्च न्यायालयों को बताया गए हैं –
    1. किसी राज्य का उच्च न्यायालय, तथा 29 राज्यों में से मात्र 24 राज्यों में उच्च न्यायालयों का गठन किया गया है।
    2. दूसरे वर्ग में उन उच्च न्यायालयों का समावेश है जिनकी अधिकारिता का विस्तार दूसरे राज्य-क्षेत्र तक कर दिया गया है, जैसे- पंजाब और हरियाणा राज्य के लिए एक ही उच्च न्यायालय है, इसी प्रकार कलकत्ता उच्चन्यायालय का विस्तार अण्डमान-निकोबार द्वीप समूह पर भी कर दिया है।
    3. उच्च न्यायालय वे है जो अपने राज्य-क्षेत्र में अंतिम अपीलीय अधिकारिता रखते है, जैसे गोवा, दमन आदि में उच्च न्यायालय का गठन नहीं किया गया है। ऐसी स्थिति में वहाँ के कमिश्नर का न्यायालय जो कि अपील और पुनरीक्षण में अंतिम अधिकारिता रखता है, इस संहिता के प्रायोजन के लिए वहां का उच्च न्यायालय माना गया है।
  • धारा 6 के अधीन दण्ड न्यायालय के विभिन्न वर्गों का उल्लेख किया गया है। इस धारा के अनुसार प्रत्येक राज्य में छः प्रकार के दण्ड न्यायालयों की व्यवस्था की गई है जो निम्न है –
    1. उच्च न्यायालय, (धारा 474 एवं 407 में दिये गए उपबन्ध के अनुसार)
    2. इस संहिता के अधीन किसी विशिष्ट विधि द्वारा स्थापित न्यायालय (धारा4(2) एवं धारा 5 उपबन्धानुसार)
    3. सेशन न्यायालय
    4. प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट और किसी महानगर क्षेत्र में महाँअगर मजिस्ट्रेट
    5. द्वितीय वर्ग का न्यायिक मजिस्ट्रेट
    6. कार्यपालक मजिस्ट्रेट
  • वर्तमान व्यवस्था के अनुसार महानगर के मजिस्ट्रेट को न्यायिक मजिस्ट्रेट ही माना गया है। परन्तु महानगर क्षेत्र के कार्यपालक कर्तव्यों के निष्पादन के लिए नियुक्त जिला-मजिस्ट्रेट तथा अन्य मजिस्ट्रेट कार्यपालक मजिस्ट्रेट होंगे।
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