दण्ड न्यायालय का वर्गीकरण
- दण्ड प्रक्रिया संहिता के अन्तर्गत जिन दण्ड न्यायालयों का गठन किया गया है, वे निम्नलिखित हैं –
- सत्र न्यायालय
- न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय
- प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय, एवं
- द्वितिय वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय
- मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का न्यायालय
- विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट का न्यायालय
- महानगर मजिस्ट्रेट के न्यायालय
- विशेष महानगर मजिस्ट्रेट के न्यायालय
- कार्यपालक मजिस्ट्रेट के न्यायालय
- जिला मजिस्ट्रेट के न्यायालय
- उपखण्ड मजिस्ट्रेट के न्यायालय
- विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के न्यायालय
- धारा 7 के अन्तर्गत राज्य सरकार को उच्च न्यायालय से परामर्श करने के पश्चात् –
- खण्डों और जिलों की सीमाओं या संख्या में परिवर्तन करने की शक्तियाँ दी गई हैं।
- किसी जिले को उपखण्डों में विभाजित करने; एवं
- ऐसे उपखण्डों की सीमाओं या संख्या में परिवर्तन करने की शक्तियाँ दी गई है।
- धारा 8 में महानगर क्षेत्र (Metropolitan Area) की व्याख्या की गई है। ऐसे नगर जिनकी जनसंख्या दस लाख से अधिक है उसे महानगर कहा जाता है। ऐसे महानगर क्षेत्र के मजिस्ट्रेट को महानगर-मजिस्ट्रेट का नाम दिया गया हैं।
- महानगर क्षेत्र की सीमाओं को बढ़ाने, कम करने या उनमें कोई परिवर्तन करने का अधिकार राज्य-सरकार को दिया गया है। राज्य-सरकार अधिसूचना द्वरा ऐसा कर सकेगी। लेकिन इन सीमाओं में ऐसी कोई कमी या परिवर्तन नहीं किया जा सकेगा जिससे कि उस महानगर क्षेत्र की जनसंख्या ही दस लाख से कम हो जाये।
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