राष्ट्रीय कृषि विकास योजना ।

वर्ष 1991 में शुरू किए गए आर्थिक सुधारों के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था उच्च विकास के पथ पर अग्रसर है , किंतु आर्थिक सुधारों के बावजूद सकल घरेलू उत्पाद में जहां अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों का योगदान बढ़ा है वहीं वर्ष 1991 की तुलना में कृषि के योगदान में कमी आई है । वर्ष 2016 - 17 में सकल GVA में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र का योगदान मात्र 15 प्रतिशत रह गया । कृषि और उसके समवर्गी क्षेत्रों की  मंद विकास गति को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय विकास परिषद ने 29 मई , 2007 को हुई बैठक में एक विशिष्ट अतिरिक्त केंद्रीय सहायता योजना शुरू करने का निश्चय किया । राष्ट्रीय विकास परिषद ने 11वीं पंचवर्षीय योजना में कृषि क्षेत्र में 4 प्रतिशत वार्षिक विकास हासिल करने का भी लक्ष्य रखा था । इस परिप्रेक्ष्य में योजना आयोग ( वर्तमान में नीति आयोग ) के परामर्श से कृषि एवं सहकारिता विभाग , कृषि मंत्रालय ने वर्ष 2007 - 08 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना की शुरुआत की ।

लक्ष्य:- कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र के समग्र विकास को सुनिश्चित करते हुए 12वीं पंचवर्षीय योजना अवधि के दौरान 4 प्रतिशत की वांछित वार्षिक  वृद्धि दर को प्राप्त करना तथा उसे बनाए रखना ।

उद्देश्य:-

राज्यों को प्रोत्साहित करना ताकि कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में सार्वजनिक निवेश को बढ़ाया जा सके । 

राज्योंको कृषि एवं संबद्ध योजनाओं के नियोजन एवं निष्पादन की प्रक्रिया में लोचशीलता एवं स्वायत्तता प्रदान करना ।

यह सुनिश्चित करना कि जलवायुवीय स्थितियों , प्रौद्योगिकी एवं प्राकृतिक संसाधनों की उपलब्धता के अनुरूप जिला एवं राज्यों हेतु कृषि योजनाएं बनाई जाएं । 

यह सुनिश्चित करना कि स्थानीय आवश्यकताएं / फसलों / प्राथमिकताओं को राज्य की कृषि योजनाओं में ठीक प्रकार से प्रदर्शित किया जाए ।

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