मुगल अधिकारियों ने अंग्रेजों की बदमाशी को फौरन माफ कर दिया। वह यह तो जान भी नहीं सकते थे कि अहानिकर दिखने वाले यह विदेशी व्यापारी एक दिन देश के लिए गंभीर खतरा बन जाएंगे। इसके बजाय उन्होंने यह मान लिया कि कंपनी के द्वारा किए जा रहे विदेशी व्यापार से भारतीयों दस्तकारों और व्यापारियों को भी लाभ होगा और इस तरह सरकारी खजाने की आमदनी बढ़ेगी। इसके अलावा जमीन पर कमजोर होने के बावजूद अंग्रेज समुद्र में काफी मजबूत थे और इसलिए वह ईरान, पश्चिमी एशिया, उत्तरी और पूर्वी अफ्रीका तथा पूर्वी एशिया के साथ होने वाले भारतीय व्यापार और जहाजरानी को पूरी तरह से तहस-नहस करने में समर्थ थे।
औरंगजेब ने ₹1.5 लाख लेकर उन्हें फिर से व्यापार करने की छूट दे दी। 1698 में कंपनी ने सुतानती, कलिकत्ता और गोविंदपुरी की जमींदारी प्राप्त कर ली और वहां उन्होंने अपनी फैक्ट्री के इर्द-गिर्द फोर्ट विलियम नाम का किला बनाया। यही गांव जल्द ही बढ़कर एक नगर बन गया जिसे आज हम सभी कोलकाता के नाम से जानते हैं। 1717 में कंपनी ने सम्राट फर्रूखसियर से एक फरमान प्राप्त किया जिसमें 1691 में उन्हें प्राप्त अधिकारों को दोबारा मान्यता दी गई और उन्हें गुजरात और ढक्कन तक भी बढ़ा दिया गया था।
18 वीं सदी के पूर्वार्ध में बंगाल पर मुर्शिद कुली खां और अली वर्दी खा जैसे नवाबों का शासन था। वह अंग्रेज व्यापारियों पर नियंत्रण रखते थे तथा अपने विशेष अधिकारों के दुरुपयोग से उन्हें रुकते थे। उन्होंने अंग्रेजों को कोलकाता की किलेबंदी को मजबूत बनाने और नगर पर स्वतंत्र रूप से शासन करने की छूट भी नहीं दी। यहां ईस्ट इंडिया कंपनी नवाब की एक जमीदार हो कर रह गई।