दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 : दण्ड न्यायालय का वर्गीकरण - 03

क्रमशः....

  • धारा 11 में प्रथम और द्वितीय वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेटों के न्यायालयों की स्थापना एवं ऐसे न्यायालयों के लिए पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति के बारे में व्यवस्था की गई है। न्यायालयों की स्थापना राज्य सरकार द्वारा और पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति उच्च न्यायालयों द्वारा की जाती है।
  • जुडिशल मजिस्ट्रेट के न्यायालय हर जिले में (जो मेट्रोपोलिटन क्षेत्र नहीं है) कितने भी प्रथम श्रेणी अथवा द्वितीय श्रेणी के जुडिशल मजिस्ट्रेट हो सकते हैं, यह निर्णय राज्य सरकार, उच्च न्यायलय के साथ परामर्श में लेगी (धारा 11)। इन दोनों के बीच तालमेल इसलिए जरुरी है क्यूंकि, जहाँ क्षेत्र और वित्तीय उपलब्धता सरकार बेहतर समझती है, वहीँ हर क्षेत्र में अदालत की पहुंच हो यह फैसला उच्च न्यायालय बेहतर कर सकता है। वहीँ इस सभी न्यायालयों में पद सँभालने वालों को यह शक्ति उच्च न्यायलय द्वारा दी जाती है, यानी उनकी नियुक्ति राज्य का उच्च न्यायालय करेगा - धारा 11(2)।
  • महानगर क्षेत्र से भिन्न प्रत्येक जिले में एक मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट का न्यायालय होता है। इसकी नियुक्ति उच्च न्यायालय द्वारा कि जाती है एवं वह प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट की श्रेणी का व्यक्ति होता है। उच्च न्यायालय किसी प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सकता है एवं उसे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्तियोँ प्रदान कर सकता है। (धारा 12)।
  • चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट - अब हर जिले में उच्च न्यायालय एक सीजेएम की नियुक्ति करता है जो की प्रथम श्रेणी का जुडिशियल मजिस्ट्रेट होगा धारा 12 (1)। जुडिशल मजिस्ट्रेट का पद इसलिए आवश्यक है क्यूंकि यह जिले में मजिस्ट्रेसी का प्रमुख होता है। यह दूसरे जुडिशल मजिस्ट्रेट के ऊपर अधिकारिता रखता है।
  • एडिशनल चीफ जुडिशल मजिस्ट्रेट - उच्च न्यायालय प्रथम श्रेणी के किसी भी न्यायिक मजिस्ट्रेट को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सकता है, और इस तरह के मजिस्ट्रेट के पास इस अधिनियम के तहत या किसी भी कानून के तहत मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की सभी शक्तियां होंगी।
  • सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट - उच्च न्यायालय किसी भी उप-डिवीजन में प्रथम श्रेणी के किसी भी न्यायिक मजिस्ट्रेट को सब-डिविजनल न्यायिक मजिस्ट्रेट के रूप में नामित कर सकता है और इस अनुभाग में निर्दिष्ट जिम्मेदारियों से मुक्त कर सकता है जैसा कि अवसर की आवश्यकता होती है।

आगे और भी है...

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