दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 : दण्ड न्यायालय का वर्गीकरण - 05

क्रमशः....

  • धारा 15 के अनुसार – प्रत्येक मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सेशन न्यायाधीश के अधीनस्थ होगा, और प्रत्येक अन्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सेशन न्यायाधीश के साधारण नियंत्रण के अधीन रहते हुए, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (C.J.M.) के अधीनस्थ होगा।
  • मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, समय-समय पर, ऐसे नियम बना सकते हैं या विशेष आदेश दे सकते हैं, जो इस संहिता के अनुरूप हों और अपने अधीन न्यायिक मजिस्ट्रेट के बीच कार्य के वितरण हेतु हों धारा 15(2)
  • प्रत्येक मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सत्र न्यायाधीश के अधीनस्थ होते हैं; और प्रत्येक अन्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सत्र न्यायाधीश के सामान्य नियंत्रण के अधीन, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के अधीनस्थ होते हैं धारा 15 (1)
  • मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अपनी अधिकारिता अधीनस्थ मजिस्ट्रेटों के कार्यों का वितरण करने के लिए समय-समय पर इस संहिता से युक्तिसंगत नियम बना सकेंगे अथवा आदेश दे सकेंगे। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट जिले के सभी मजिस्ट्रेटों का प्रधान जोता हऐ तथा वह इस संहिता की धारा 12 के प्रावधानों के अन्तर्गत अन्वेषण अधिकारी पर नियंत्रण और अधीक्षण की शक्ति रखता है। उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्णीत दिल्ली न्यायिक सेवा संघ बनाम गुजरात राज्य के वाद में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए अभिनिर्धारित किया गया कि देश की न्याय-प्रणाली का एक तात्कालिक अधिकारी होने के नाते मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी का यह कर्तव्य है कि वह यह सुनिश्चित करें कि अपराधों के अन्वेषण में पुलिस अपने अधिकार शक्ति का दुरूपयोग तो नही कर रही है। विधि के प्रवर्तन तथा नगारिकों के जीवन और सम्पत्ति हेतु अपराध निवारण में पुलिस की प्रमुख भूमिका है।
  • जिले में चाहे किसी भी स्थान पर अपराध कारित हुआ हो, मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी(मजिस्ट्रेट) उसका प्रसंज्ञान ले सकता है लेकिन वह अपने क्षेत्राधिकार का प्रयोग सम्पूर्ण भारत पर नही कर सकेगा।(यूनियन ऑफ इण्डिया बनाम बी.एन. अनन्तपद्यनाभैया, A.I.R. 1971 S.C. 1836)

आगे और भी है ......

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