ध्वनि -
ध्वनि तरंगे अनुदैर्ध्य तरंगें होती हैं इसकी उत्पत्ति वस्तुओं में कंपन होने से होती है सब प्रकार का कंपन ध्वनि उत्पन्न नहीं कर सकता है जिन तरंगों की आवृत्ति लगभग 20 कंपन प्रति सेकेंड से 20000 कंपन प्रति सेकेंड के बीच होती है उन की अनुभूति हमें अपने कानो द्वारा होती है और हम उन्हें सुन सकते हैं जिन यांत्रिक तरंगों की आवृत्ति इस सीमा से कम या अधिक होती है उसके लिए हमारे काम सुग्राही नहीं हैं और हमें केवल उन तरंगों के लिए किया जाता है जिन की अनुभूति हमें अपने कानो द्वारा होती है भिन्न-भिन्न मनुष्य के लिए ध्वनि तरंगों की आवृत्ति परिसर अलग अलग हो सकती हैं-
अव श्रव्य तरंगे-
20हर्ट्ज से नीचे की आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगों को और अवश्रव्य तरंगे कहते हैं इन्हीं से मनुष्य कान सुन नहीं सकते हैं इस प्रकार की तरंगों को बहुत बड़े आकार के स्रोतों से उत्पन्न किया जा सकता है.
पराश्रव्य तरंगें= 20000हर्ट से ऊपर की तरंगों को पराश्रव्य तरंगें कहा जाता है मनुष्य के कान से सुन नहीं सकते हैं परंतु जानवर जैसे कुत्ता बिल्ली चमगादड़ आदि से सुन सकते हैं इन तरंगों को गॉल्टन की सीटी के द्वारा तथा दाब विद्युत प्रभाव की विधि द्वारा कार्टज के क्रिस्टल के कंपनियों से उत्पन्न की जाती हैं.