दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 : दण्ड न्यायालय का वर्गीकरण - 06

क्रमशः ...

  • धारा 16 के अनुसार – महानगर क्षेत्र में महानगर मजिस्ट्रेटों के न्यायालयों की स्थापना राज्य सरकार द्वारा उच्च न्यायालय के परामर्श से की जाती है एवं ऐसे न्यायालयों के पीठासीन अधिकारियों की नियुक्ति उच्च न्यायालय द्वारा की जाती है।
  • धारा 17 के अन्तर्गत उच्च न्यायालय किसी महानगर मजिस्ट्रेट को उस महानगर क्षेत्र के लिए मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट एवं अपर महानगर मजिस्ट्रेट के रूप में नियुक्त कर सकेगा।
  • धारा 18 में विशेष महानगर मजिस्ट्रेट के न्यायालयों की व्यवस्था की गई है। ऐसे मजिस्ट्रेट की नियुक्ति केवल महानगर क्षेत्र में की जाती है।
  • उच्च न्यायालय या राज्य सरकार किसी महानगर मजिस्ट्रेट को महानगर क्षेत्र के बाहर किसी स्थानीय क्षेत्र में प्रथम वर्ग के न्यायिक मजिस्ट्रेट की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए सशक्त कर सकती है। (दण्ड प्रक्रिया संहिता (संशोधन) अधिनियम, 1978 धारा 6 द्वारा प्रतिस्थापित)
  • धारा 19 के अनुसार – प्रत्येक मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट और अपर मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट सेशन न्यायाधीश के अधीनस्थ एवं अन्य सभी महानगर मजिस्ट्रेट के अधीनस्थ होंगे।
  • धारा 20 के अन्तर्गत राज्य सरकार को प्रत्येक जिले एवं महानगर क्षेत्र में आवश्यकतानुसार कार्यपालक मजिस्ट्रेटों के न्यायालय स्थापित करने की शक्तियाँ दी गई है। राज्य सरकार ऐसे प्रत्येक न्यायालय में कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति करती हैं एवं उनमें से एक को जिला मजिस्ट्रेट के पद पर नियुक्त करती है।
  • कार्यपालक मजिस्ट्रेट के मुख्यतया तीन सोपान हैं –
    1. जिला मजिस्ट्रेट;
    2. अपर जिला मजिस्ट्रेट; एवं
    3. उपखण्ड मजिस्ट्रेट
  • अपर जिला मजिस्ट्रेट, जिला मजिस्ट्रेट से ठीक नीचे की श्रेणी का अधिकारी होता है। यह जिला मजिस्ट्रेट की अनुपस्थिति में उसके कार्यों को देखता है। इस पद पर केवल कार्यपालक मजिस्ट्रेट को ही नियुक्त किया जा सकता है। (अजायब सिंह बनाम गुरुवचन सिंह AIR 1965 S.C. 1619)
  • प्रत्येक जिले और प्रत्येक महानगरीय क्षेत्र में, राज्य सरकार कई व्यक्तियों को कार्यकारी मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सकती है, और उनमें से एक को जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त किया जायेगा। धारा 20 (1)
  • राज्य सरकार, अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट होने के लिए किसी भी कार्यकारी मजिस्ट्रेट को नियुक्त कर सकती है, और इस तरह के मजिस्ट्रेट के पास इस कोड के तहत या किसी भी अन्य कानून के तहत जिला मजिस्ट्रेट की शक्तियों होंगी जैसा राज्य सरकार निर्देश दे धारा 20 (2)
  • राज्य सरकार, एक सब-डिवीज़न के प्रभारी के लिए एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट नियुक्त कर सकती है और अवसर की आवश्यकता के अनुसार उसे उस प्रभार से मुक्त कर सकती है; और मजिस्ट्रेट को उस प्रभार के रूप में सब-डिविशनल मजिस्ट्रेट कहा जाएगा धारा 20 (4)

आगे और भी है ...

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