नई मशीनों और कारखानों में लगाने के लिए देश में पर्याप्त का पूंजी जमा हो चुकी थी। इसके अलावा यह पूंजी सामंत वर्ग के हाथों में ना थी जो इसे बिलासी जीवन और भोग में खर्च कर डालता, बल्कि यह व्यापारियों और उद्योगपतियों के हाथों में थी जो इसे उद्योग और व्यापार में लगाने के लिए उत्सुक थे। इस मामले में अफ्रीका, एशिया, वेस्ट इंडीज तथा लातिनी, अमेरिका से तथा ईस्ट इंडिया कंपनी और उसके नौकरों द्वारा भारत से प्लासी युद्ध के बाद ले जाई गई पूंजी में औद्योगिक प्रसार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जनसंख्या की तीव्र वृद्धि ने फलते फूलते उद्योगों की अधिक और सस्ते श्रम की आवश्यकताएं पूरी की। 1740 के बाद ब्रिटेन की जनसंख्या तेजी से बढ़ी। 1780 के बाद के 50 वर्षों में दुगनी हो गई।
ब्रिटेन में एक ऐसी सरकार थी जिस पर व्यापारियों तथा उद्योग पतियों का प्रभाव था और इसलिए उसने बाजारों तथा उपनिवेशों के लिए दूसरे देशों से जमकर युद्ध किया।
अधिक उत्पादन की मांग की मांगे प्रौद्योगिकी के विकास द्वारा पूरी की गई। ब्रिटेन के उभरते उद्योगों ने हरग्रिप्स, वाट, क्रॉम्पटन, कार्टराइट तथा दूसरे लोगों के अविष्कार का भरपूर उपयोग किया। इनमें से अनेक आविष्कार सदियों पहले हुए थे मगर अब उनका उपयोग होने लगा। इन आविष्कारों तथा भाप की शक्ति का पूरा फायदा उठाने के लिए अब उत्पादन को अधिकाधिक कारखानों तक सीमित किया जाने लगा।इन अविष्कारों ने औद्योगिक क्रांति को जन्म नहीं दिया बल्कि फैलते बाजारों के उत्पादन तेजी से बढ़ाने की उद्योगपतियों की इच्छा तथा इसके लिए आवश्यक पूंजी लगा सकने की उनकी क्षमता के कारण, तब तक विद्यमान प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जा सका और नए आविष्कारों की आवश्यकता का अनुभव किया गया।