RINGS OF FIRE

यह प्रशांत महासागर के चारों ओर विस्तृत
विभिन्न विवर्तनिकी प्लेट किनारों के सहारे फैली हुई ज्वालामुखीय व भूकम्पीय श्रृंखला है,इसी कारण इसे ‘RINGS OF FIRE’  नाम दिया गया है| यहाँ लगभग 400 ज्वालामुखी है और यहां विश्व के 76% सक्रिय ज्वालामुखी पाए जाते हैं|पिछले सालों में हुए 25 सर्वाधिक विनाशकारी ज्वालामुखी ‘RINGS’  के सहारे ही आये हैं, जो स्थलमंडलीय प्लेटों के संचलन और अभिसरण के परिणाम थे। इस क्षेत्र के ज्वालामुखीय दृष्टि से सक्रिय होने का प्रमुख कारण इसका क्षेपण मंडल  में स्थित होना है| यह एक ऐसा मंडल होता है जहाँ स्थलमंडलीय प्लेटें आपस में टकराती हैं| जब दो स्थलमंडलीय प्लेटें आपस में टकराती हैं तो अधिक भार वाली प्लेट कम भार वाली प्लेट के नीचे धंस जाती है और अधिक गहराई में जाने पर पिघल कर मैग्मा में बदल जाती है और यही मैग्मा ज्वालामुखी के रूप में धरातल पर प्रकट होता है|प्लेटें के टकराने के कारण इस क्षेत्र में भूकंप भी आते हैं और भ्रंशों व वलित पर्वतों का निर्माण होता है|
यह प्रशांत महासागर में दक्षिण अमेरिका और उत्तर अमेरिका महाद्वीप से लेकर पूर्वी एशिया ,ऑस्ट्रेलिया व न्यूजीलैंड तक विस्तृत घोड़े की नाल  के आकार जैसे क्षेत्र को दिया गया नाम है| यहाँ लगभग 450 ज्वालामुखी और विश्व के कुल 75% सक्रिय ज्वालामुखी पाए जाते हैं।क्राकाटोआ,माउंट फ्यूजी और सेंट हेलेना जैसे विश्व प्रमुख ज्वालामुखी भी इसी क्षेत्र में पाए जाते हैं।इन सभी में पोपोकैटेपिटल ‘RINGS OF FIRE’  में स्थित सबसे अधिक विनाशक ज्वालामुखी है| द्वीपीय देश जापान,जो विवर्तनिकी दृष्टि से पृथ्वी के सबसे सक्रिय स्थानों में से एक है यहRINGS OF FIRE’  के पश्चिमी किनारे पर स्थित है।RINGS OF FIRE  के सहारे महासागरीय खाईयाँ,वलित पर्वत और भूकम्पीय कंपन पाए जाते हैं|विश्व का सबसे गहरा महासागरीय स्थान मैरियाना खाई पश्चिमी प्रशांत महासागर में मैरियाना द्वीप के पूर्व में स्थित है।

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