यूरोप में राष्ट्रवाद का विकास करने के पूर्व हमें यह जानना आवश्यक है कि राष्ट्र क्या है ? 'राष्ट्र' शब्द के उच्चारण मात्र से ही हमारे मस्तिष्क में हमारे राष्ट्र के प्रतीक चिन्ह जैसे तिरंगा, कमल, भारत का नक्शा आदि प्रतिमान के रूप में उभरते हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रत्येक राष्ट्र की अपनी पहचान होती है जो दूसरे राष्ट्र से उसे अलग करती है जैसे उसकी सीमा भाषा संस्कृति, भाषा इत्यादि ।
राष्ट्र की सर्वमान्य परिभाषा नहीं दी जा सकती। राष्ट्र बहुत हद तक एक ऐसा समुदाय होता है जो अपने सदस्यों के सामूहिक विश्वास भावना आकांक्षा और कल्पनाओं के सहारे एक सूत्र में बंधा होता है। यह कुछ खास मान्यताओं पर आधारित होता है जिन्हें लोग उस समुदाय के लिए करते हैं जिससे वह अपनी पहचान कायम करते हैं। राष्ट्र के प्रति यह भावना 'राष्ट्रवाद' कहलाती है।
यूरोप में राष्ट्रवाद एक ऐसे राजनीतिक सिद्धांत के रूप में उभरा जिसका इतिहास रचने में महत्वपूर्ण योगदान है। राष्ट्रवाद कई चरणों से गुजर चुका है। 19वीं शताब्दी के यूरोप में इसने कई छोटी छोटी रियासतों के एकीकरण से 72 राष्ट्र की स्थापना का मार्ग प्रशस्त किया। जर्मनी और इटली का गठन एकीकरण एवं सुध्रणीरण इसी प्रक्रिया से हुआ था। राष्ट्रवाद बड़े-बड़े साम्राज्य के उत्थान एवं पतन के लिए उत्तरदााई रहा है। यूरोप में बीसवीं शताब्दी के आरंभ में ऑस्ट्रिया हंगरी और रूसीी साम्राज्य तथा अफ्रीका में ब्रिटेन फ्रांस हॉलैंड और पुर्तगाल साम्राज्य के विघटन केेेे मूल मैंमें राष्ट्रवाद ही था।