लाहौर षड्यंत्र मुकदमा (1929) -

-भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त की गिरफ्तारी के कारण अनेक एचएसआरए क्रांतिकारी भी गिरफ्तार किए गए और उन पर लाहौर षड्यंत्र कांड में संयुक्त रूप से मुकदमा चलाया गया लाहौर षड्यंत्र कांड में अधिकांश क्रांतिकारी दोषी पाए गए तथा उनमें से तीन भगत सिंह सुखदेव और राजगुरु को 23 मार्च 1931 को फांसी दे दी गई फांसी के समाचार से भारतीय जनता को बड़ा धक्का लगा सारे देश में हड़ताली हुई जुलूस निकाले गए और शोक सभा में हुई चंद्रशेखर आजाद भाग निकले तथा भागने में सफल रहे ।

किंतु बाद में इलाहाबाद में पुलिस के साथ हुई एक भिड़ंत में उनकी मृत्यु हो गई 18 अप्रैल 1930 को इंडियन रिपब्लिकन  एसोसिएशन के क्रांतिकारियों ने सूर्य सेन के नेतृत्व में गांव के पुलिस शस्त्रागार पर हमला किया पंजाब में हरी किशन ने पंजाब के गवर्नर की हत्या की कोशिश की।

दिसंबर 1930 ईस्वी में तीन जवानों विनय ,बादल गुप्ता और दिनेश गुप्ता ने कोलकाता की राइटर्स बिल्डिंग में प्रवेश करके कारागार महा निरीक्षक की हत्या कर दी थी। 

 चटगांव आरमरी रेड-

                        बंगाल के नए क्रांतिकारी संगठनों में सूर्य सेन द्वारा स्थापित आई आर ए का विशिष्ट स्थान था ।सूर्य सेन ने असहयोग आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया था आगे चलकर वह एक राष्ट्रीय स्कूल के शिक्षक बन गए और इसलिए वह सामान सामान्यतः 'मास्टर दा 'के नाम से प्रसिद्ध  थे। 

सूर्य सेन ने आई आर ए की ओर से एक घोषणा पत्र जारी किया।

जिसमें चटगांव, Mehman Singh, बारी साल के शस्त्रागार ऊपर एक ही समय हमला करने की योजना थी इन क्रांतिकारियों ने पुलिस अस्त्रागार सहायक टुकड़ी पर अधिकार करने टेलीफोन एक्सचेंज और चार घरों को नष्ट करने के लिए चार जत्थे भेजे थे 65 युवक और युवतियों ने ब्रिटेन की भारतीय सेना की वर्दी पहन कर पुलिस शस्त्रागार पर 18 अप्रैल 1930 को हमला किया वंदे मातरम और इंकलाब जिंदाबाद के नारों के बीच तिरंगा फहराया गया ।

और काम चलाओ क्रांतिकारी सरकार के गठन की घोषणा की गई जिस के राष्ट्रपति सूर्यसेन थे। यहघटना चटगांव और आरमरी रेड के नाम से जानी जाती है ।

आर्मी रेड मुकदमे के क्रांतिकारियों को अंडमान में आजीवन कारावास की सजा दी गई। 

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