हाल ही में वैज्ञानिकों को स्वालबार्ड द्वीपसमूह में एक ऐसा बैक्टीरिया मिला है जो लगभग 10 वर्ष पहले दिल्ली में खोजा गया था जिसे नई दिल्ली में मैटलो-बीटा-लैक्टामेज-1 नाम दिया गया था और इसे ही साधारण भाषा में सुपरबग जीन कहा जाता है ।
सुपरबग क्या है ?
सुपर बग एक ऐसा बैक्टीरिया है जिसमें कई प्रतिरोधी जीन होते हैं जिसके कारण दवाओं का असर नहीं होता है कभी कभार तो ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है की एंटीबायोटिक दवाओं का असर भी समाप्त हो जाता है।
चिंता का विषय यह है की सुपर बग बैक्टीरिया अब पृथ्वी के ऐसे क्षेत्र में पहुँच गया है जहाँ अभी तक बदलाव नहीं हुआ है ।
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि आर्कटिक मिट्टी में पाया जाने वाला यह बैक्टीरिया मुख्यतः पशुओं, मनुष्यों तथा पक्षियों के माध्यम से यहां यहां तक पहुंचा है। यह बैक्टीरिया 10 वर्ष पहले की तुलना से अधिक शक्तिशाली हो गया है । विशेषज्ञों का तो मानना है कि बहुत जल्द हमें जानलेवा और असाध्य संक्रामक रोगों का सामना भी करना पड़ सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का यह मानना है कि आने वाले समय में अत्यधिक जटिल और असाध्य संक्रमण रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया उत्पन्न होंगे । कुछ संक्रमण रोग जैसे-यक्ष्मा , निमोनिया आदि पर अभी से साधारण एंटी - बायोटिक बेअसर साबित हो रही है।
समस्या से निदान -
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा यह चेतावनी दी गई है कि हमें एंटी - बायोटिक का प्रयोग कम से कम करना चाहिए और संक्रमण हो जाने पर रोगी को तब तक दवाओं का प्रयोग करना है जब तक उस रोग के बैक्टीरिया पूरी तरह से नष्ट ना हो जाए ताकि भविष्य में उस बैक्टीरिया से कोई भी बीमारी ना उत्पन्न हो सके क्योंकि ऐसा देखा गया है कि रोगी पूर्ण रूप से बैक्टीरिया को समाप्त करने से पहले ही दवाओं का सेवन बंद कर देता है जिससे बाद में यह रोग ज्यादा प्रभावी होकर फिर से रोगी को रोग ग्रस्त कर देता है। जिससे रोग विकराल रूप धारण कर लेते हैं और रोगी की मृत्यु भी हो जाती है ।