विश्व मलेरिया प्रतिवेदन के विषय में संक्षिप्त लेख

विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा प्रकाशित 2018 के विश्व मलेरिया प्रतिवेदन के अनुसार मलेरिया से सर्वाधिक ग्रस्त 11 देशों में भारत ही एक ऐसा देश है जहाँ मलेरिया के मामलों में अच्छी - खासी कमी आई है । वर्ष 2016 की तुलना में 2017 में मलेरिया के मामले 24 % कम हुए है । जिसका तात्पर्य है कि मलेरिया को समाप्त करने के वैश्विक प्रयासों का नेतृत्व अब भारत के हाथ में आ गया है । 
             भारत से प्रेरणा लेकर अन्य देश मलेरिया से निपटने की प्रेरणा ले सकते हैं ।क्योंकि जिस प्रकार भारत में इसका नियंत्रण किया गया है वह एक सराहनीय कार्य है जो अन्य देशों के लिए एक अच्छा उदाहरण बन कर सामने आया है।
         भारत को मलेरिया हटाने में सफलता इसलिए मिल रही है क्योंकि जहां एक ओर  विश्वभर में अपनाई गई रणनीतियों के अनुरूप चल रहा है तो दूसरी ओर अपना स्वदेशी मलेरिया - विरोधी कार्यक्रम भी चला रहा है । 2015 में पूर्व एशिया शिखर सम्मलेन में 2030 तक मलेरिया समाप्त करने का वचन देने के उपरान्त भारत इसके लिए एक पंचवर्षीय राष्ट्रीय रणनीतिक योजना का अनावरण किया था । इसमें मलेरिया को नियंत्रित करने के स्थान पर उसे समाप्त करने पर बल दिया गया था । 
         
उद्देश्य -   इस योजना का उद्देश्य है कि भारत के 678 जिलों में से 571 जिलों में 2022 तक मलेरिया का उन्मूलन कर दिया जाए । इस योजना में 10 , 000 करोड़ रू . का खर्च है । ओडिशा राज्य एक मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम चला रहा है जिसका नाम दुर्गम अंचलेर मलेरिया निराकरण रखा गया है । जो इस राज्य में मलेरियाा को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहा है ।
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