बालाजी विश्वनाथ ने 1719 में मराठों की ओर से मुगल सम्राट फर्रूखसियर के एक प्रतिनिधि हुसैन अली खान के साथ एक संधि की जिसे प्रसिद्ध इतिहासकार रिचर्ड टेंपल ने मराठा साम्राज्य के इतिहास का मैग्नाकार्टा या महाधिकार पत्र कहा है इस संधि की मुख्य शर्तें इस प्रकार हैं :-
- दक्कन के 6 मुग़ल सुबो पर मराठों को अधिकार प्रदान किया गया तथा इसके चौथ तथा सरदेशमुखी वसूलने का अधिकार भी हैदराबाद, गोंडवाना, खानदेश और बरार के जो क्षेत्र अभी-अभी मराठों ने जीता था और जिसे मुगलों ने ले लिया था उस पर एक बार फिर से मराठाओं का प्रभुत्व स्थापित हुआ ।
- शिवाजी के स्वराज्य क्षेत्र कहे जाने वाले भाग पर भी राजस्व वसूलने का अधिकार मिला।
- 1689 से ही अपने एक अधिकारी सूर्य जी पिसाली के विश्वासघात की वजह से मुगलों की कैद में रह रहे साहू की माता येशु बाई को भी मुगल कैद से मुक्त कर दिया गया
- कोल्हापुर में रह रहे संभाजी द्वितीय को साहू द्वारा परेशान नहीं किया जाएगा उल्लेखनीय है कि संभाजी द्वितीय , शिवाजी द्वितीय की मृत्यु के बाद कोल्हापुर की गद्दी पर बैठा था ।
इस प्रकार बालाजी विश्वनाथ ने अपनी दूरदर्शिता पूर्ण नीति के बल पर मराठों की शक्ति को काफी शक्तिशाली बना दिया। बालाजी विश्वनाथ के द्वारा की गई संधि को मुगल सम्राट रफी उददरजरात ने मान्यता प्रदान की ।1719 में बालाजी मराठों की एक सेना लेकर दिल्ली पहुंचा और उसने सैयद बंधुओं को फर्रूखसियर को गद्दी से हटाने में अपना सहयोग दिया। बालाजी की मृत्यु के पश्चात 17 अप्रैल 1720 को उसका पुत्र बाजीराव प्रथम पेशवा बना