संगोला की संधि (14 जनवरी 1750)

  • साहू जी की मृत्यु के पश्चात 14 जनवरी 1750 को अपनी मराठा छत्रपति राजाराम द्वित्तीय से बालाजी बाजीराव ने एक संधि की जिसे संगोला की संधि कहकर पुकारा गया।
  • इस संधि के अंतर्गत राज्य के सभी प्रमुख विभाग मराठा छत्रपति ने पेशवा को सौंप दिया यद्यपि अष्ट प्रधान मंत्रियों के पद तो बने रहे किंतु प्रशासन से उनका कोई संबंध नहीं रहेगा
  • छत्रपति राज्य को संवैधानिक प्रधान माना गया और सतारा में उसके निवास की व्यवस्था कर दी गई। अब मराठा राजनीति का केंद्र पुणे हो गया।
  • बालाजी बाजीराव पेशवा को नाना साहिब के नाम से भी जाना जाता है उसे सतारा में पेशवा का पद मराठा शासक साहू ने सौंपा था।
  • इस पेशवा के काल की सबसे महत्वपूर्ण घटना पेशवा के पद का वंशानुगत हो जाना तथा दरअसल साहू निसंतान था उसने अपने उत्तराधिकारी के रूप में ताराबाई के पुत्र राजाराम रिक्तियों को नियुक्त किया जिसकी सहर्ष स्वीकृति पेशवा बालाजी बाजीराव ने प्रदान कर दी थी।
  • इसी वजह से खुश होकर साहू ने अपनी मृत्यु के पूर्व अपने उच्चाधिकारियों को यह निर्देश दिया कि पेशवाओं को अपने वंशानुगत पद से विस्थापित नहीं किया जाता।
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