भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान हैदराबाद के चेयरमैन बी वी आर मोहन रेड्डी की अध्यक्षता में सरकार द्वारा गठित समिति के द्वारा प्रतिवेदन समर्पित कर दिया है।इस समिति का गठन का मुख्य उद्देश्य देश में अभियांत्रिकी शिक्षा के विस्तार के लिए मध्यकालीन और अल्पकालीन योजना प्रस्तुत करने के लिए किया गया था समिति के द्वारा दिए गए सुझाव पर अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद द्वारा पुन: अध्ययन तथा विचार किया जाएगा की इस समिति द्वारा प्रदान की गई रिपोर्ट के अनुसार आगे की रणनीति कैसी होगी ।
महत्वपूर्ण बिंदु -
प्रत्येक वर्ष अभियंत्रण की आधे से अधिक सीटें खाली रह जाती हैं इन कालेजों में कुल मिलाकर इसके लिए लगभग 16 लाख सीटें थी परंतु 50% सीटों के लिए कोई उम्मीदवार नहीं आया अर्थात कुल सीटों का आधा ही भरा जा सका ।
इसके अलावा दूसरी ओर अभियंत्रण की दूसरी पढ़ाईयों में जैसे- कंप्यूटर साइंस ,कंप्यूटर अभीयंत्रण में 60% सीटें भरी हुई थी तथा पारंपरिक अभियंत्रण जैसे- यांत्रिक ,विद्युत ,इलेक्ट्रॉनिक्स और सिविल के लिए उपलब्ध कुल सीटों का मात्र 40% ही उपयोग हुआ वर्तमान समय में व्यवस्था में कई बड़ी त्रुटियां देखने को मिली है जिसके कारण से यह प्रतिशत कम होता जा रहा है जैसे- प्रयोगशाला एवं शिक्षक वर्ग , भ्रष्टाचार , खराब अवसंरचना, उद्योगों के साथ तालमेल ना होना , सभी विद्यार्थियों का प्लेसमेंट ना हो पाना तथा तकनीकी परिस्थितियों का अभाव इसका मुख्य कारण है जो छात्र वर्तमान समय में इन क्षेत्रों में अध्ययन कर रहे हैं उनको नौकरी ना मिलना भी इस पर एक नकारात्मक प्रभाव छोड़ता है जो कि भविष्य में इस वर्ग में छात्रों की संख्या को दिन-प्रतिदिन कम करता जाएगा ।