जब ऐसे क्षेत्र बनाए जाते हैं तो कई बातों को ध्यान में रखा जाता है जैसे इन क्षेत्रों की प्रकृति का स्वरूप, इन क्षेत्रों में नदी अपवाह तंत्र तथा संचार के साधन, इन क्षेत्रों की सांस्कृतिक तथा भाषा की बहुलता तथा सामाजिक आर्थिक विकास का स्तर एवं उसकी आवश्यकता, सुरक्षा तथा कानून व्यवस्था आदि।
क्षेत्रीय परिषदों के उद्देश्य अथवा कार्य
1. इनका कार्य देश में एकीकरण की भावना को विकसित करना है।
2. तीव्र राज्य- भावना, क्षेत्रवाद, भाषावाद जैसी द्वेष पैदा करने वाली प्रवृत्तियों को रोकने में सहायता करना है।
3. देश के अलग-अलग क्षेत्रों के मध्य आर्थिक - सामाजिक विकास में संतुलन सुनिश्चित करना है।
4. बड़ी एवं मुख्य विकास योजनाओं के सफलतापूर्वक एवं तेजी से क्रियान्वित करने के लिए आपसी सहयोग करना है।
5. राज्यों की सीमाओं तथा अन्तर राज्य परिवहन से संबंधित समस्याओं का आपसी समाधान करना।
6. केंद्र सरकार राज्यों को सामाजिक तथा आर्थिक विषयों पर एक दूसरे की सहायता करने में तथा एक समान नीतियों के विकास के लिए विचारों तथा अनुभवों के आदान-प्रदान में सक्षम बनाना है।
• क्षेत्रीय परिषदों का उद्देश्य राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों तथा केंद्र के बीच सहभागिता तथा समन्वय को बढ़ावा देना है।
• ये परिषदें आर्थिक - सामाजिक योजना, भाषायी, अल्पसंख्यक, सीमा - विवाद, अंतर राज्य परिवहन आदि जैसे संबंधित विषयों पर विचार विमर्श प्रदान करती हैं।
अत: यह परामर्शदात्री निकाय है।