दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 : दण्ड न्यायालय का वर्गीकरण - 07

क्रमशः .... 

  • धारा 21 के अनुसार – राज्य सरकार किसी क्षेत्र-विशेष के लिए अथवा किन्हीं विशिष्ट कार्यों का पालन करने के लिए कार्यपालक मजिस्ट्रेट की नियुक्ति कर सकेगी और ऐसे कार्यपालक मजिस्ट्रेट को ‘विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट’ के नाम से जाना जायेगा। ऐसे विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति उतने समय तक के लिए की जा सकेगी जितने समय के लिए राज्य-सरकार उचित समझे एवं इस संहिता के अधीन वे शक्तियां प्रदत्त की जा सकेंगी जो उचित प्रतीत हो।
  • इसके अलावा कुछ विशिष्ट कार्य अथवा क्षेत्र के लिए एक स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट भी नियुक्त किया जा सकता है, राज्य सरकार द्वारा (धारा 21)।
  • धारा 22 का शीर्षक है – कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की स्थानीय अधिकारिता। इस धारा के अनुसार – जिला मजिस्ट्रेट समय-समय पर कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की स्थानीय अधिकारिता को परिनिश्चित करेगा, लेकिन वह अपनी इस शक्ति का प्रयोग राज्य सरकार के नियंत्रण के अधीन रहते हुए ही करेगा।
  • राज्य सरकार के नियंत्रण के अधीन, जिला मजिस्ट्रेट समय-समय पर उन क्षेत्रों की स्थानीय सीमाओं को परिभाषित कर सकते हैं जिनके भीतर कार्यकारी मजिस्ट्रेट उन सभी या किसी भी शक्ति का प्रयोग कर सकते हैं, जो उन्हें इस कोड के अंतर्गत मिली है (धारा 22)।
  • धारा 23 का शीर्षक है – कार्यपालक मजिस्ट्रेटों का अधीनस्थ होना। इस धारा के अनुसार अपर जिला मजिस्ट्रेटों को छोड़कर अन्य सभी कार्यपालक मजिस्ट्रेट जिला मजिस्ट्रेट के अधीनस्थ एवं (उपखण्ड मजिस्ट्रेट को छोड़कर) उपखण्ड में शक्ति का प्रयोग कर रहा प्रत्येक कार्यपालक मजिस्ट्रेट जिला मजिस्ट्रेट के सधारण नियंत्रण में रहते हुए उपखंड मजिस्ट्रेट के अधीनस्थ होगा।
  • अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट के अलावा अन्य सभी कार्यकारी मजिस्ट्रेट, जिला मजिस्ट्रेट के अधीनस्थ होंगे, और प्रत्येक कार्यकारी मजिस्ट्रेट (सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट के अलावा) सब-डिवीजन में शक्तियों का प्रयोग करते हुए, सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट के अधीनस्थ होंगे हालांकि, जिला वे मजिस्ट्रेट के सामान्य नियंत्रण के अधीन हमेशे रहेंगे (धारा 23)।
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