क्षेत्रीय परिषद (Zonal counsil) की संरचना और पूर्वोत्तर परिषद (North- East counsil)

क्षेत्रीय परिषद के सदस्य
1. केंद्रीय गृह मंत्री (अध्यक्ष)
2. सभी सदस्य राज्यों के मुख्यमंत्री (उपाध्यक्ष)
3. सभी सदस्य राज्यों से दो अन्य मंत्री (सदस्य)
4. सभी संघ राज्य क्षेत्रों के प्रशासन (सलाहकार)

— केंद्र सरकार का गृह मंत्री इन पाचवी क्षेत्रीय परिषदों का अध्यक्ष होता है
—प्रत्येक मुख्यमंत्री क्रमानुसार 1 वर्ष के लिए परिषद के अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं।
—मुख्यमंत्री और प्रत्येक राज्य से राज्यपाल द्वारा नामित किए गए दो अन्य मंत्री इन परिषदों के सदस्य होते हैं।

निम्न व्यक्ति क्षेत्रीय परिषद में सलाहकार (बैठक में बिना मताधिकार) के रूप में हो सकते हैं

1. नीति आयोग द्वारा मनोनीत व्यक्ति
2. क्षेत्र में स्थित प्रत्येक राज्य सरकार के मुख्य सचिव
3. क्षेत्र के प्रत्येक राज्य के विकास आयुक्त

• क्षेत्रीय परिषदों का उद्देश्य राज्यों,  केंद्र शासित प्रदेशों तथा केंद्र के बीच सहभागिता तथा समन्वय को बढ़ावा देना है।

• ये परिषदें आर्थिक - सामाजिक योजना, भाषायी, अल्पसंख्यक, सीमा - विवाद, अंतर राज्य परिवहन आदि जैसे संबंधित विषयों पर विचार विमर्श प्रदान करती हैं।
अत: यह परामर्शदात्री निकाय है।

पूर्वोत्तर परिषद
• क्षेत्रीय परिषदों के अलावा एक पूर्वोत्तर परिषद का गठन संसदीय अधिनियम - पूर्वोत्तर परिषद अधिनियम 1971 द्वारा किया गया। इसका मुख्यालय शिलांग में है।

• शुरुआत में इस परिषद में 7 सदस्य असम, मणिपुर, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मेघालय तथा त्रिपुरा थे।  वर्ष 2002 में परिषद में संशोधन के द्वारा सिक्किम को आठवेंं सदस्य के रूप में इस परिषद में सम्मिलित किया गया था।
• इस परिषद में 8 राज्यों के राज्यपालों तथा मुख्यमंत्री के साथ राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत एक अध्यक्ष तथा तीन अन्य सदस्य शामिल होते हैं।
• इनका कार्य क्षेत्रीय परिषद के कार्यों के समान होता है।

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