विज्ञान की इस शाखा के अंतर्गत किसी का कण या पिंड पर बल लगाने पर उत्पन्न होने वाले प्रभाव व उससे उत्पन्न गति का अध्ययन किया जाता है।
इसे दो भागों में बांटा जा सकता है :-
> स्थिति विज्ञान (statics) :- इसके अंतर्गत किसी कण या पिंड पर बल के कार्य करते रहने पर भी वस्तु के विराम अवस्था में रहने का अध्ययन किया जाता है अर्थात किसी वस्तु पर बल तो लग रहा होता है लेकिन उस वस्तु पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता। इस स्थिति में वह वस्तु विराम अवस्था में होती हैं। मतलब वस्तु की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होता जैसे दीवार के सहारे खड़ी हुई सीढ़ी, बिजली का खंबा, छत से लटका हुआ पंखा आदि।
यहां दीवार के सहारे खड़ी सीढ़ी द्वारा दीवार पर बल तो लग रहा है लेकिन दीवार की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होता, उसी प्रकार बिजली का खंभा धरती पर बल तो लगा रहा है लेकिन धरती की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं होता। इसी प्रकार छत से लटका हुआ पंखा उसमें लगी मोटर द्वारा बल प्रयोग के कारण चलता है लेकिन छत की स्थिति वैसे ही रहती हैं।
गति विज्ञान ( Dynamic) :- इसमें किसी कण यह पिंड पर बल के कार्य करते रहने पर उस कण या पिंड की स्थिति अर्थात गति में होने का अध्ययन किया जाता है, जैसे चलती हुई रेलगाड़ी, ऊपर से नीचे गिरता कोई कण।