नागरिकता (Citizenship) :- नागरिक और नागरिकता क्या है?

आधुनिक राष्ट्र राज्य में नागरिकता का अर्थ बहुत ही व्यापक है। टी एच मार्शल ने 1950 में लिखित अपनी पुस्तक नागरिक और सामाजिक वर्ग (सिटीजनशिप एंड सोशल ग्रुप) में नागरिकता को परिभाषित किया है। मार्शल के अनुसार नागरिकता में तीन प्रकार के अधिकार शामिल किए जाते हैं जैसे नागरिक, राजनैतिक और सामाजिक अधिकार( civil, political and social group)
• नागरिक अधिकार के द्वारा व्यक्ति के जीवन, आजादी और जायदाद की सुरक्षा प्रदान की जाती है।
• राजनीतिक अधिकार द्वारा व्यक्ति को शासन प्रक्रिया में भाग लेना सुनिश्चित करते हैं।
• सामाजिक अधिकार व्यक्ति के लिए शिक्षा और रोजगार आसानी से उपलब्ध करवाते हैं।

इस प्रकार व्यापक अर्थ में नागरिक का अभिप्राय किसी राज्य में निवास करने वाले उन व्यक्तियों से है जो सभी प्रकार के राजनीतिक, नागरिक और सामाजिक अधिकारों का उपयोग करते हैं। व्यक्ति इन अधिकारों का उपयोग करके सामाजिक भाईचारा और राष्ट्र के विकास में योगदान प्रदान करते हैं।
अतः नागरिकता वह स्थिति है जिसमें एक व्यक्ति को नागरिक के रूप में वे सभी अधिकार प्राप्त होते हैं जो संविधान द्वारा निर्धारित किए जाते हैं।

• जो व्यक्ति उपरोक्त परिभाषा के अंतर्गत नहीं आते उन्हें विदेशी कहा जाता है। इन्हें मित्र राष्ट्र व शत्रु राष्ट्र में बांटा जा सकता है।
• नागरिकों को प्राकृतिक, पंजीकृत और देशीयकरण में बांटा गया है।
– प्राकृतिक नागरिकता व्यक्ति को जन्म, वंश के आधार पर प्रदान की जाती है।
– पंजीकृत नागरिकता देशवासी एवं विदेशी दोनों को दी जा सकती है।
– देशीयकरण द्वारा नागरिकता विदेशी व्यक्तियों को कुछ शर्तों के साथ पंजीकृत किया जा सकता है।

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