भारतीय संविधान में नागरिकता के प्रावधान
भारतीय संविधान के भाग 2 में अनुच्छेद 5 से 8 तक में भारतीय नागरिकता का प्रावधान किया गया है। भाग 2 में कुल 7 अनुच्छेद हैं जिनमें से अनुच्छेद 5 से 8 तक में भारतीय नागरिकता की प्राप्ति, अनुच्छेद 9 में नागरिकता की समाप्ति, अनुच्छेद 10 नागरिकता का संरक्षण तथा अनुच्छेद 11 संसद को नागरिकता से संबंधित कानून बनाने का अधिकार प्रदान करती है।
–भारतीय संविधान में नागरिकता संबंधी प्रावधानों को तीन भागों में बांटा गया है
1. अधिवास द्वारा नागरिकता
2. पाकिस्तान से प्रवास पर नागरिकता
3. भारत से बाहर रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्ति की नागरिकता
=> अधिवास द्वारा नागरिकता citizenship by domicile)
इसका वर्णन अनुच्छेद -5 में किया गया है। इस अनुच्छेद के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति नागरिकता पाने का अधिकारी होगा जो भारतीय संविधान के शुरू होने पर भारत के राज्य क्षेत्र में अधिवास करता हो तथा निम्नलिखित शर्तों में से कम से कम एक शर्त को पूरा करता हो:-
1. उसका जन्म भारतीय राज्य क्षेत्र में हुआ हो,
2. उसके माता-पिता में से कोई एक भारत के राज्य क्षेत्र में जन्मा हो,
3. वह संविधान लागू होने से पहले कम से कम 5 वर्षों तक साधारण तौर पर भारत राज्य क्षेत्र में निवास कर रहा हो।
{नगीना देवी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया 2010 के मामले में पटना उच्च न्यायालय ने यह निर्णय दिया था कि यदि व्यक्ति का जन्म संविधान लागू होने पर हुआ हो तो उसे भारत में अधिवासी नहीं माना जाएगा}
# अधिवास
• संविधान में अधिवास के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है अर्थात इसे परिभाषित नहीं किया गया है।
• प्रदीप जैन बनाम यूनियन 1984 के वाद में दिए गए निर्णय के आधार पर अधिवास के दो आवश्यक तत्व हैं
1. स्थायी रूप से एवं अनिश्चितकाल तक निवास
2. ऐसे निवास का अर्थ
- यह निवास से इस प्रकार अलग है कि निवास मात्र केवल एक भौतिक कृत्य होता है जबकि अधिवास में निवास के साथ - साथ अनिश्चित समय तक रहने का मतलब भी जुड़ा रहता है।