भारतीय संविधान में नागरिकता के प्रावधान (part -3) :- भारत से पाकिस्तान जाने वाले तथाभारत के बाहर रहने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों को दी जाने वाली नागरिकता

=> भारत से पाकिस्तान जाने वाले तथा फिर लौट कर आने वाले प्रवासी

भारत से पाकिस्तान जाने वाले तथा फिर लौट कर आने वाले व्यक्तियों (प्रवासियों ) के संबंध में नागरिकता संबंधी प्रावधान अनुच्छेद 7 में किए गए हैं।
इस अनुच्छेद के अनुसार यदि किसी व्यक्ति ने मार्च 1947 के पश्चात भारत से पाकिस्तान के लिए प्रवर्जन कर लिया हो वह भारत का नागरिक नहीं माना जाएगा लेकिन यदि वह स्थाई रूप से भारत लौटने के लिए अनुमति लेकर वापस आ गया है तो उसकी नागरिकता के संबंध में वही नियम - कानून लागू होंगे जो अनुच्छेद 6 में 19 जुलाई 1948 के बाद भारत आने वाले व्यक्तियों पर लागू होते हैं अर्थात ऐसे व्यक्ति को पंजीकरण के लिएआवेदन करना होगा जो कम से कम 6 महीने तक भारत में रहने के बाद ही किया जा सकेगा।
 

=> भारत के बाहर रहने वाले भारतीय मूल के  व्यक्तियों को दी जाने वाली नागरिकता

अनुच्छेद-8 में उन व्यक्तियों की नागरिकता के संबंध में प्रावधान किया गया है जो संविधान के लागू होने के समय भारत के निवासी नहीं थे परंतु भारतीय मूल के हैं।

इसके अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म अथवा जिनके माता-पिता, दादा-दादी,  नाना-नानी में से किसी का जन्म भारत शासन अधिनियम 1935 द्वारा परिभाषित भारत में हुआ था तो वह भारत का नागरिक माना जाएगा, यदि व्यक्ति भारत डोमिनियन की सरकार द्वारा निर्धारित प्रारूप में और निश्चित विधि से अपने द्वारा उस देश में जहां वह इस समय निवास कर रहा है, भारत के राजनायिक या कौंसलीय प्रतिनिधि (diplomatic counselor representative) को इस संविधान के प्रारंभ से पहले या उसके पश्चात आवेदन किए जाने पर ऐसे राजनायिक या कौंसलीय प्रतिनिधि द्वारा भारत का नागरिक रजिस्ट्रीकृत कर लिया गया है।

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