2. वंश से नागरिकता (citizenship by descent)
• इस अधिनियम में यह प्रावधान किया गया था यदि कोई व्यक्ति भारत के बाहर 26 जनवरी या उसके बाद जन्म लेता है तो वह है भारत का नागरिक माना जाएगा, यदि उसके जन्म के समय उसके माता-पिता में से कोई भी एक भारत का नागरिक हो। लेकिन 1992 के संशोधन के द्वारा उसमें जोड़ा गया कि 10दिसंबर,1992 के बाद यदि किसी व्यक्ति का जन्म विदेश में होता है तो है भारत का नागरिक माना जाएगा यदि उसके माता या पिता में से कोई एक भारत का नागरिक हो।
• माता की नागरिकता के आधार पर विदेश में जन्मे व्यक्ति को नागरिकता देने का प्रावधान नागरिकता संशोधन अधिनियम 1992 द्वारा किया गया है।
• 2005 के अध्यादेश के द्वारा भारतीय नागरिकता अधिनियम,1995 में संशोधन करके यह जोड़ा गया कि 3 दिसंबर 2004 के बाद जन्म लेने वाले बच्चे तभी भारत का नागरिक माना जाएगा जब जन्म जन्म के 1 वर्ष के अंदर उस बच्चे का पंजीकरण भारतीय कोंसिल में करा दिया जाए।
• 3 दिसंबर 2004 के बाद भारत से बाहर जन्म लेने वाले व्यक्ति वंश के आधार पर भारतीय नागरिकता प्राप्त नहीं कर सकता। यदि उसके जन्म के समय 1 वर्ष के भीतर ‘भारतीय राजनयिक कार्यालय' में उसके जन्म का पंजीकरण न करा करा दिया गया हो या केंद्र सरकार की सहमति से उस समय अवधि में पंजीकरण न हुआ हो।
3. पंजीकरण द्वारा नागरिकता (citizenship by registration)
• इस अधिनियम में यह प्रावधान किया गया था कि भारत सरकार नागरिकता प्राप्त करने का आवेदन प्राप्त करने पर किसी व्यक्ति को भारतीय नागरिक के रूप में पंजीकृत कर सकती है, यदि वह निम्नलिखित वर्गों से संबंध रखता हो
1. ऐसे व्यक्ति जो भारत के नागरिक नहीं है।
2. भारतीय मूल के वेे व्यक्ति जो अविभाजित भारत के बाहर किसी देश अथवा स्थान में निवास कर रहे हो।
3. भारतीय मूल के व्यक्ति जो अविभाजित भारत के बाहर किसी देश अथवा स्थान में निवास कर रहे हो।
4. उन व्यक्तियों के नाबालिक बच्चे जो भारत के नागरिक हैं।
5. व्यस्क और क्षमता से पूर्ण व्यक्ति जिसके माता-पिता 7 साल से भारत में रह रहे हो और भारतीय नागरिक के रूप में पंजीकृत हो।
6. ऐसा व्यक्ति जो भारत में विदेशी नागरिक के रूप में पंजीकृत है और भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन करने से पहले वह 1 साल भारत में रहा हो।
— भारत की नागरिकता पंजीकरण द्वारा प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को भारत में लगातार 5 से 7 वर्षों तक रहने का प्रमाण प्रस्तुत करना होता है। नागरिकता संशोधन अधिनियम 1986 के पहले यह निवास करने की अवधि मात्र 6 महीने थी।