जेनेटिक माॅडिफाइड फसलें ऐसे पौधे हैं जिनके डी0एन0ए0 में जेनेटिक इंजीनियरिंग विधि का प्रयोग करके परिवर्तन किया जाता है। डी0एन0ए0 में परिवर्तन करने का प्रमुख उद्देश्य सम्बन्धित पौधे में एक नवीन गुण का विकास करना होता है। जेनेटिकली माॅडिफाइड फसलों का विकास सम्बन्धित फसल को पोषक तत्वों से भरपूर बनाने पर्यावरण के प्रति अनुकूल बनाने, सूखारोधी तथा किसी विशेेष कीट या बीमारी से सुरक्षा के प्रति प्रतिरोधी बनाने के लिए किया जाता है। किसानों के द्वारा इस तकनीकी को व्यापक तौर पर अपनाया गया है। उदाहरण के तौर पर वर्ष 1996 में जहाॅ जेनेटिकली माॅडिफाइड फसलों को मात्र 42 लाख एकड़ में उगाया गया वहीं 2015 में यह आकड़ा बढ़कर 4440 एकड़ हो गया।
एक ओर जहाँ कुछ कृषि विशेषज्ञ जेनेटिकली माॅडिफाइड फसलों के पक्ष में तर्क प्रस्तुत कर रहें है वहीं कुछ कृषि विशेेषज्ञ इन फसलों को उपयुक्त नहीं मानते है। इनका तर्क है कि ये फसलें पर्यावरण एवं जैव विविधता के लिए हानिकारक है। साथ ही ये फसलें किसानों को अपने ऊपर आश्रित बना लेती है, क्योंकि इन फसलों के उत्पाद को बीज के रूप में पुनः इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में यह जरूरी हो जाता है कि जेनेटिक माॅडिफाइड फसलों के पक्ष एवं प्रतिपक्ष में दिए जाने वाले तर्को का समुचित आकलन किया जाये।
पक्ष में तर्कः
1. जेनेटिक इंजीनियरिंग विधि के माघ्यम से फसलों के गुणों में आवश्यक परिवर्तन लाया जा सकता है। इससे फसलों को न सिर्फ कीटरोधी बनाया जा सकता है बल्कि उन्हें सूखारोधी भी बनाया जा सकता है।
2. जिस प्रकार तीव्र गति से जलवायु परिवर्तन की समस्या गंम्भीर रूप धरण करती जा रही है उससे यह जरूरी हो गया है कि ऐसी फसलें उगायी जायें जो बदलते मौसम के अनुरूप हों।
3. जेनेटिकली माॅडिफाइड फसलों के द्वारा उत्पादन को काफी बड़ी मात्रा में बढ़ाया जा सकता है। इससे खाद्य सुरक्षा को सुुुुनिश्चत कर लोगों को खाद्य असुरक्षा से मुक्त कराया जा सकता है।
4. जेनेटिकली माॅडिफाइड फसलों से कम जमीन में ही अधिकतम उत्पादन को सम्भव बनाया जा सकता है। इसका लाभ किसानों को होगा क्योंकि इससे उनकी आय में बढ़ोत्तरी हो सकेगी।
5. जेनेटिकली माॅडिफाइड फसलें पर्यावरण के लिए हितकारी साबित हो सकती है, क्योंकि इन फसलों के लिए बहुत ही कम जमीन की आवश्कता होती है अतः बढ़ती आबादी की जरूरतों के लिए वनों को काटने की जरूरत नहीं होगी।
6. इन फसलों के द्वारा उत्पादन को काफी मात्रा तक बढ़ाया जा सकता है इससे बाजार में उत्पादों की उपलब्धता बढाने में मदद मिलेगी। बाजार में उत्पादों की समुचित उपलब्ध्ता सेे मुद्रास्फीति में भी मदद मिलेगी।
7. सबसे बढ़कर जेनेटिक माॅडिफाइड फसलों से उत्पादों में विविधता आयेगी क्योंकि जेनेटिक इंजीनियरिंग के द्वारा फसलों के गुणों में आवश्यक एवं मनचाहे परिवर्तन किये जा सकेंगे।
8. जेनेटिक इंजीनियरिंग विधि से ऐसी फसलों का विकास किया जा सकता है जो पानी की कम से कम खपत में तैयार हो सकती है तथा अत्यधिक तापमान का सामना कर सकती है। ऐसी फसलें वर्तमान समय की प्रमुख आवश्यकता बनकर उभरी हैं क्योंकि पानी की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है तथा तापमान बढ़ता जा रहा है।
विपक्ष में तर्कः
1. जेनेटिकली माॅडिफाइड फसलों से यद्यपि उत्पादन को बढ़ाने में मदद मिली है किन्तु ये फसलें मानव स्वास्थ्य के लिए कितनी सुरक्षित है यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है। ब्राउन विश्वविद्यालय के द्वारा किये गये एक हालिया शोध में यह बात सामने आयी है कि इन फसलों में एलर्जी सम्बंधित समस्या पायी गयी है जो मानव के लिए हानिकारक है।
2. जेनेटिक माॅडिफाइड फसलों के उत्पादों को बीज के रूप में प्रयोग नहीं किया जा सकता है। प्रत्येक फसल के लिए नये बीज प्रयोग करने पड़ते है। इस प्रकार जेनेटिक माॅडिफाइड फसलें किसानों को पूर्णतः अपने ऊपर आश्रित बना लेती है। ज्ञातव्य है कि परम्परागत फसलों में किसान अपनी फसल के ही उत्पाद को बार-बार बीज के रूप में प्रयोग करते है।
3. इन फसलों के बारे में ऐसा कहा जाता है कि ये कुछ स्थानीय पौधें एवं फसलों को हानि पहुँचा सकती है जिससे जैव विविध्ता के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता है।
4. जेनेटिक माॅडिफाइउ फसलों को उगाने में अत्ययधिक मात्रा में पानी की जरूरत होती है। साथ ही इनमें विभिन्न प्रकार के कीटनाशकों का प्रयोग भी किया जाता है। इस प्रकार इन फसलों के विषय में जो सकारात्मक पक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है वह संदेह के घेरे में है।
5. इन फसलों को लगातार उगाने से किसान अपनी परम्परागत फसलों के विषय में अनिच्छुक हो सकते है। इसका सबसे बड़ा नुकसान यह होगा कि भविष्य में परम्परागत फसलों के विषय में किसी को कोई जानकारी ही नहीं होगी।
6. जेनेटिकली माॅडिफाइड फसलों से कुछ नयी प्रकार की बीमारियाँ भी फैल सकती है। इसका कारण यह है कि इन फसलों को संवर्धित करने के लिए बैक्टीरिया एवं विषाणुओं का प्रयोग किया जाता है। इस प्रकार यह तथ्य निश्चित तौर पर इन फसलों को कटघरें में खड़ा करता है।
7. जेनेटिक माॅडिफाइड फसलों के बीजों का पेटेण्ट होता है अतः जिस पफसल के बीज पर जिस कम्पनी का पेटेण्ट होता है वह बीजों के लिए मनचाही कीमत वसूल कर सकती है।
संतुलित दृष्टिकोणः
जेनेटिकली माॅडिफाइड फसलें अर्थात जीन संवर्धित फसलों में भूख एवं कुपोषण जैसी समस्याओं का समाधन करने की व्यापक क्षमता निहित है। सबसे बढकर जेनेटिकली माॅडिफाइड फसलें रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता को कम करके पर्यावरण के लिए भी हितकारी है किन्तु इन फसलों के नकारात्मक पक्षों पर भी घ्यान देने की जरूरत है। जीन संवर्धित फसलें मानव स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है या नही इस सम्बन्ध् में पर्याप्त शोधकी आवश्यकता है। पर्याप्त शोध के पश्चात् ही किसी निष्कर्ष तक पहुॅचा जा सकता है। इसी प्रकार जीन संवर्धित फसलों के प्रति कोई नकारात्मक पूर्वधरणा बना लेना भी उचित नहीं होगा। यह एक नवीन तकनीकी है जो निरंतर विकास के मार्ग पर अग्रसर है। इस तकनीकी विकास को समर्थन दिया जाना चाहिए क्योंकि देश का विकास आखिरकार इसी तकनीकी विकास एवं नवाचार पर निर्भर है। अंततः निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि जीन संवर्धित फसलों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए किन्तु मानव के लिए प्रयोग हेतु अनुमति देने से पूर्व इसके सभी पक्षों का समुचित आकलन करना आवश्यक होगा