जड़त्व आघूर्ण और जड़त्व (moment of Intertia and Intertia )

जड़त्व आघूर्ण (moment of Intertia)
न्यूटन के पहले नियम के अनुसार यदि कोई पिंड या वस्तु विराम की अवस्था में है तो वह विराम अवस्था में रहेगा जब तक कि उस पर कोई बाहरी बल न लगाया जाए। ठीक उसी तरह से जब कोई पिंड या वस्तु किसी अक्ष के परित: घूमता है तो वह अपनी स्थिति में परिवर्तन का विरोध करता है। यही पिंड का घूर्णन अक्ष के परित: जड़त्व आघूर्ण कहलाता है।

• पिंड के किसी कण का घूर्णन अक्ष के परित: जड़त्व आघूर्ण, उस कण के द्रव्यमान तथा उसकी घूर्णन अक्ष से दूरी के वर्ग के गुणनफल के बराबर होता है।
उदाहरण बैलगाड़ी, साइकिल, रिक्शा आदि के पहियों का जड़त्व आघूर्ण बढ़ाने के लिए पहियों के रिम भारी व मोटे लेकिन बीच का भाग पतला या खोखला बनाया जाता है। साइकिल के पहियों में बीच में केवल तीलियां  लगाते हैं। अगर जड़त्व आघूर्ण ज्यादा होगा तो साइकिल चलाते-चलाते पैेडल मारना बंद करने पर भी साइकिल काफी दूर तक लुढ़कती चली जाएगी और पैेडल रोकते ही साइकिल का संतुलन बिगड़ जाएगा और साइकिल गिर जाएगी।

जड़त्व (Intertia)
सभी वस्तु अपनी विराम अवस्था व एक समान गति अवस्था में किसी भी प्रकार के परिवर्तन का विरोध करती है। इसी गुण को ही वस्तु का जड़त्व कहते हैं। किसी वस्तु का जड़त्व उसके द्रव्यमान के अनुक्रमानुपाती होता है।

किसी वस्तु का जड़त्व उसी गति में लाने के लिए उस पर लगाए गए बल का विरोध नहीं करता। किसी वस्तु पर लगाया गया थोड़ा सा बल भी वस्तु को गति ला आ सकता है (यदि उस पर घर्षण शून्य हो)। जड़त्व वस्तु का वह गुण होता है जो यह निर्धारित करता है कि बल से वस्तु में कितना त्वरण उत्पन्न होगा। इस प्रकार जड़त्व प्रतिक्रिया से बिल्कुल अलग है।

Posted on by