• यह वह बाहरी कारक होता है जो किसी पिंड या वस्तु पर लगा कर या तो उसकी गति में परिवर्तन करता है या करने का प्रयास करता है। यह किसी विराम अवस्था (state of rest) में स्थित वस्तु को गति अवस्था में लाता है।
उदाहरण के लिए स्थिर अथवा विराम अवस्था में रखी हुई गेंद को पैर से मारकर या हाथ से धक्का देकर (बल लगाकर) गति अवस्था में लाया जा सकता है। इसी प्रकार दूर से आती हुई गेंद को हाथ से पकड़ कर (बल लगाकर) रोका जा सकता है। इसके अलावा बल लगाकर किसी वस्तु की आकृति के आकार को भी बदला जा सकता है जैसे किसी बोतल को बीच से जोर से दबाने पर वह पिचक जाती है। इस प्रकार उस की आकृति व आकर दोनों बदल जाते हैं।
• बल सदिश राशि है। इसे F से व्यक्त किया जाता है। इसका मान पिंड के द्रव्यमान (mass) तथा त्वरण के गुणनफल के बराबर होता है। यदि किसी पिंड का द्रव्यमान m तथा उस पर उत्पन्न त्वरण a हो तो
बल (f)= द्रव्यमान (m) × त्वरण (a)
इसका मात्रक kkgms -2 या न्यूटन (N)होता है। सीजीएस प्रणाली में इसका मात्रक डाइन (Dyne) होता है। एक न्यूटन बल का मान 10 -5 डाइन के बराबर होता है। एक ही समय में किसी पिंड के संवेग में परिवर्तन (change in momentum) को भी बल कहते हैं। अगर किसी वस्तु का द्रव्यमान(m), आरंभिक वेग (initial velocity) u, अंतिम वेग (final velocity) v तथा परिवर्तन का समय (time) हो तो
बल (f)= संवेग परिवर्तन की दर (change in momentum)
= mv - mu/t
यदि (t) = 1 हो तो
बल (f) = mu- mv
अर्थात एक ही समय में संवेग में परिवर्तन