• एल० एम० सिंघवी की अध्यक्षता वाली समिति ने सन 2000 में कुछ देशों में निवास करने वाले भारतीय मूल के व्यक्तियों को दोहरी नागरिकता प्रदान करने की सिफारिश की।
• भारत सरकार ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2003 के माध्यम से भारत सरकार ने नागरिकता अधिनियम 1955 में संशोधन करके 16 देशों (पाकिस्तान, बांग्लादेश को छोड़कर) के भारतीय मूल के नागरिकों के लिए विदेशी भारतीय नागरिकता का प्रावधान किया।
• भारतीय मूल के दूसरे देशों में रहने वाले व्यक्तियों को भारत में नागरिकता से अलग विशेष दर्जा देने का प्रावधान किया है।
— विदेशों में बसे भारतीय मूल के लोगों की श्रेणी
A) अनिवासी भारतीय non resident Indian (NRI)
B) भारतीय मूल के व्यक्ति person of Indian origin (PIO)
C) भारत की सीमा पर ये समुद्र कार्य नागरिक overseas citizen of Indian (OCI)
A) अनिवासी भारतीय (NRI)
ऐसे भारतीय नागरिक जो नौकरी अथवा व्यवसाय के मकसद से वर्ष में 182 दिन या उससे अधिक समय तक दूसरे देशों में रहे तथा वे भारतीय पासपोर्ट धारक हैं, अनिवासी भारतीय कहलाते हैं।
• भारत सरकार द्वारा संयुक्त राष्ट्र संघ और अन्य नियुक्तियों पर भेजे जाने वाले व्यक्तियों को अनिवासी भारतीय का दर्जा दिया जाता है।
• भारत सरकार द्वारा वर्ष 2011 में एक अधिसूचना जारी करके अनिवासी भारतीयों को भारत में मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने की सुविधा दी गई।
• फॉर्म - 6(A) के द्वारा विदेशों में रहने वाले सक्षम मतदाता आवेदन करके मतदाता सूची में अपना नाम शामिल करवा सकते हैं।